दुनिया इस सत्य को स्वीकार कर रही है कि समाज के उत्थान में पुरुषों की तरह महिलाओं के योगदान की भी उतनी ही जरूरत है। जैसे-जैसे समाज शिक्षित हो रहा है, महिलाओं को समाज में बराबरी के दर्जे पर देखा जाने लगा है। पीएम मोदी भी देश में बेटियों-महिलाओं को आगे लाने की बात प्रमुखता से करते हैं। लेकिन उन्हीं की सरकार के इकबाल में पल रहा राजस्थान किताबों में बच्चों को ये शिक्षा दे रहा है कि महिलाओं का काम सिर्फ बच्चे पैदा करना है।
बेहद चौंकाने वाली बात दिल्ली और राजस्थान के एकेडमिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट से सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक राजस्थान की किताबें पुरुषों को हीरो दर्शाती हैं, जबकि महिलाओं को जीरो!
किताबों में वीरता, साहस और तमाम तरह के गुणों की बात पुरुषों के लिए की गई हैं, जबकि महिलाओं की उपेक्षा दिखती है।
कक्षा 3 की हिंदी किताब में एक पाठ का नाम 'खेल' हैं। इस पाठ में केवल लड़कों की तस्वीर ही छपी है, लड़कियां कहीं नजर नहीं आती हैं। इससे असमानता का भाव उत्पन्न होता है, और ये दर्शाता है कि खेल केवल लड़कों के लिए ही बने हैं।