पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया 1 अक्तूबर से ही शुरू हो गई। पहले चरण में राज्य के 16 जिलों की 71 सीटों पर चुनाव होने हैं। अभी तक किसी बड़ी पार्टी ने उम्मीदवार के नामों की घोषणा नहीं की है।
चुनाव पूर्व गठबंधन और सीट बंटवारे का ही पेच फंसा हुआ है। राजग की मुश्किल इसलिए ज्यादा है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में जदयू राजग का हिस्सा नहीं था। 15 सीटों पर जदयू और भाजपा की आमने-सामने की टक्कर हुई थी। अब उन्हीं सीटों को लेकर गठबंधन के बावजूद प्रत्याशियों के नामों की घोषणा अटकी पड़ी है।
कोशी-सीमांचल की सीटें
2015 में जिन 29 सीटों पर जदयू की जीत हुई थी और भाजपा नंबर दो पर रही थी, उनमें कोशी-सीमांचल की अधिकांश सीटें हैं। खास बात ये है कि ये इलाके मुस्लिम बहुल हैं। इनमें सुपौल, रानीगंज, रुपौली, बेनीपुर, बिहारीगंज, कुचायकोट शामिल हैं।
इनके अलावा सिकटा, फुलपरास, लौकहा, निर्मली, जीरादेई, दरौंदा, महाराजगंज, एकमा,महनार,मोरवा, सरायरंजन,मटिहानी, परबत्ता, गोपालपुर, अमरपुर,बेलहर, बिहारशरीफ, राजगीर, इस्लामपुर, अगियांव, राजपुर, दिनारा और नवीनगर विधान सभा सीट भी शामिल हैं।
विजेता और नंबर 2 अब भाई-भाई
इसी तरह पिछली बार भाजपा ने जिन सीटों पर जीत दर्ज की थी और जहां जदयू नंबर दो पर थी, उनमें बगहा, नौतन, चनपटिया, कल्याणपुर, पिपरा, मधुबन सीट शामिल हैं।
इनके अलावा सिकटी, कटिहार, जाले, कुढ़नी, मुजफ्फरपुर, बैकुंठपुर, सीवान, अमनौर,लखीसराय, बाढ़, दीघा, भभुआ, गोह, गुरुआ, हिसुआ, वारिसलीगंज और झाझा सीट भी शामिल हैं। पिछले चुनाव में जदयू और भाजपा अलग-अलग थे, इस बार भाई-भाई हैं।
जदयू को धर्मनिरपेक्ष छवि का आसरा
अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को बचाए रखने के लिए जदयू सीमांचल की सीटों को छोड़ना नहीं चाहती। भाजपा सीमांचल में जीत कर अपने पसंद का संदेश देना चाहती है। इसी के साथ जहां जीत-हार का अंतर बहुत कम मतों से रहा है उस सीटों को लेकर भी मतभेद हैं।
यही वजह है कि कई विधायक और मंत्री अभी भी संशय की स्थिति में हैं। जिनकी जीत का अंतर बहुत कम मतों से रहा है वे और चिंतिति हैं। जनता के दरबार में होने के बजाय ऐसे लोग अभी पटना और दिल्ली में सियासी आकाओं यहां डेरा जमाए हुए हैं।
राजद-कांग्रेस में भी 10 सीटों पर ही पेच
यही हाल महागठबंधन का भी है। राजद और कांग्रेस में कम से कम 10 सीटों पर बात नहीं बन पा रही है। औरंगाबाद, कुटुंबा और इमामगंज समेत 10 सीटों पर दोनों दल अपनी दावेदारी से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
पहले चरण के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 8 अकतूबर है। पांच दिन बचे हैं। उम्मीदवारी तय नहीं हो पाने से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता भी पशोपेश में हैं।