सीबीआई निदेशक बनाए गए आईपीएस अधिकारी ऋषि कुमार शुक्ला ‘न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर’ के सिद्धांत पर चलने वाले अफसर माने जाते हैं। भ्रष्टाचार से समझौता न करने की वजह से नेताओं से हमेशा उनका मतभेद बना रहा। कई बार तो इसी मुद्दे पर नेताओं से टकराव के चलते उन्होंने इस्तीफे की धमकी तक दे डाली। शुक्ला के बारे में कहा जाता है कि वह किसी भी पार्टी के नेता की गुडबुक में नहीं हैं।
मूलत: ग्वालियर के रहने वाले शुक्ला ने अपने कैरियर में 11 साल से ज्यादा समय प्रदेश और केंद्र सरकार की खुफिया एजेंसियों में सेवा दी। 1983 बैच के आईपीएस शुक्ला दो बार इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) में रहे। इस दौरान उन्होंने मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ काम किया, जो 2005 में आईबी के निदेशक बनाए गए। सूत्रों के मुताबिक निदेशक पद पर नियुक्ति में डोभाल कनेक्शन की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है। शुक्ला मप्र इंटेलीजेंस के एडीजी रहे। इसके अलावा कुछ वर्ष वह मप्र आर्थिक अपराध शाखा में आईजी रहे, जहां भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गृहमंत्री से हुआ मतभेद
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जुलाई 2016 में शुक्ला को डीजीपी नियुक्त किया। करीब ढाई साल के कार्यकाल में कई बार शुक्ला का गृहमंत्री से मतभेद रहा। बात संभालने के लिए खुद मुख्यमंत्री को दखल देना पड़ा। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले स्वास्थ्य कारणों से शुक्ला छह हफ्ते के अवकाश पर चले गए थे। इस दौरान उनकी बाईपास सर्जरी हुई। चुनाव के बाद उन्होंने दोबारा कामकाज संभाला।
जूनियर को बना दिया डीजीपी
कमलनाथ के मप्र के मुख्यमंत्री बनने के बाद डीजीपी पद से शुक्ला की विदाई तय मानी जा रही थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बावजूद वह बने रहे। 29 जनवरी को शुक्ला को हटाकर उनसे एक साल जूनियर वीके सिंह को डीजीपी नियुक्त कर दिया गया। वहीं, शुक्ला को पुलिस आवास निगम का चेयरमैन बनाया गया।
मप्र से ही दो और नाम थे चर्चा में
शनिवार को जब नियुक्ति की खबर आई, तब शुक्ला अपने दफ्तर में थे। सीबीआई निदेशक की नियुक्ति की अधिसूचना जारी होने से पूर्व किसी को भनक नहीं थी कि शुक्ला को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस पद के लिए 31 जनवरी को रिटायर हुईं मध्यप्रदेश की आईपीएस रीना मित्रा का नाम जरूर सुर्खियों में था। 1984 बैच के आईपीएस विवेक जौहरी का नाम भी बताया जा रहा था।
रॉ और सीबीआई में मप्र
सीबीआई निदेशक के पद पर ऋषि कुमार शुक्ला की नियुक्ति के बाद केंद्र में मप्र कैडर के अधिकारियों का दबदबा और बढ़ गया। बता दें कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) की कमान भी 1981 बैच के मप्र कैडर के आईपीएस अधिकारी अनिल धस्माना के पास है।
मप्र से दूसरे सीबीआई प्रमुख
शुक्ला देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी सीबीआई के मुखिया बनने वाले मप्र कैडर के दूसरे अधिकारी हैं। सीबीआई के पहले प्रमुख भी मप्र के थे। 1963 में सीबीआई की शुरुआत हुई तो धर्मनाथ प्रसाद कोहली को इसका पहला प्रमुख बनाया गया। कोहली उप्र और मध्य भारत पुलिस के प्रमुख के रूप में सेवा दे चुके थे। मध्य भारत ही आगे चलकर मध्यप्रदेश बना।