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अखिलेश यादव की रथयात्रा से आजम की दूरी पर उठे सवाल

Fri, 04 Nov 2016 04:33 AM IST
अखिलेश शर्मा/ रामपुर 
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अखिलेश यादव
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अखिलेश यादव को सबसे आला समाजवादी मुख्यमंत्री करार देने वाले आजम खां उनकी अहम रथयात्रा के आगाज पर गैरहाजिर रहे। हालांकि उन्होंने सियासी अंदाज में इसकी वजह गरीबों को आशियाना बांटने के कार्यक्रम में खुद को मसरूफ बताते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद मुख्यमंत्री के साथ है और रथयात्रा के साथ जिन गरीबों को आशियाने मिले हैं उनकी दुआएं भी शामिल हो गई हैं। रथयात्रा में अखिलेश के नाराज चाचा शिवपाल और सपा सुप्रीमो आजम खां तो जुट गए लेकिन आजम की गैरमौजूदगी कई सवाल छोड़ गई।     
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सरकार की उपलब्धियों का बखान करने के लिए रथयात्रा का गुरुवार को लखनऊ से आगाज किया, लेकिन सपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री मोहम्मद आजम खां की वहां गैर मौजूदगी का कोई राजनीतिक कारण तो नहीं? यह सवाल प्रदेश के लोगों को अचंभे में डाल रहा है। इतने बड़े कार्यक्रम में जाने के बजाय उन्होंने रामपुर में ही रहकर आसरा योजना से बनाए गए आवासों का गरीबों को आवंटन किया। 

समाजवादी पार्टी के गठन से लेकर प्रदेश में सरकारें बनवाने तक कैबिनेट मंत्री आजम खां का जो योगदान है वह किसी से छिपा नहीं है। आजम खां खुद कई बार यह बात खुले तौर पर कह चुके हैं कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में वह हैं। ऐसे में उनका लखनऊ में गुरुवार से पार्टी की रजत जयंती के मौके पर शुरू होने वाली मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रथयात्रा से दूरी बनाए रखकर अपने गृह जनपद में आसरा आवास योजना के गरीबों को आवंटन पत्र बांटने में व्यस्त रहना राजनीतिक गलियारों में तो चर्चा का विषय है ही, प्रदेश के लोगों को भी अचंभे में डालने वाला सवाल है।
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पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां किसकी ओर हैं?

आजम खां - फोटो : amar ujala
​ सूत्रों की मानें तो पार्टी में चल रहे पारिवारिक घमासान के बाद कुछ हालात बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। सवाल यह भी है कि पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां किसकी ओर हैं? शिवपाल यादव या मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। आजम हमेशा सपा में अमर सिंह की वापसी का विरोध करते रहे हैं, उन्होंने परिवार के विवाद की जड़ भी बिना नाम लिए हमेशा अमर सिंह को ही ठहराया है।

आजम यह भी खुले तौर पर मंच से कह चुके हैं कि अखिलेश यादव अब तक के सबसे बेहतर मुख्यमंत्री साबित हुए हैं, इसके बाद भी मुख्यमंत्री की रथयात्रा के शुभारंभ में नहीं जाना राजनीतिक चर्चा का विषय होना भी लाजमी है।

दूसरी ओर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को आजम सपा का मालिक बता चुके हैं, लेकिन मुलायम के लगातार अमर सिंह को अपने परिवार का वफादार साथी बताए जाने के बाद यह भी चर्चा में है, कि आजम खां का झुकाव कहीं न कहीं अखिलेश यादव की ओर अधिक है, लेकिन इन सबके बाद भी आजम गुरुवार को लखनऊ में होने के बजाय रामपुर में ही रहे।

सूत्रों के मुताबिक आजम सपा परिवार के इन विवादों से दूरी बनाए हुए हैं, ऐसा लगता है कि वह न तो सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और न मुख्यमंत्री अखिलेश यादव किसी को नाराज करना नहीं चाहते। शायद इसीलिए वह लखनऊ के कार्यक्रम के बजाए रामपुर में ही रहे। 
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अखिलेश की रथयात्रा के साथ गरीबों की दुआएं : आजम 

मोहम्मद आजम खां - फोटो : amar ujala
मुस्लिमों की हमदर्दी भरे बयान के भी कई मायने
आजम खां ने बीते सप्ताह एक बयान जारी कर मुस्लिमों के प्रति हमदर्दी जताई थी। जिसमें उन्होंने मुसलमानों को आगामी विधान सभा चुनाव के दौरान सचेत भी किया था। सपा में पारिवारिक घमासान के बीच इस बयान के भी कई मायने निकाले गए थे। इसी बीच सपा के ही एक एमएलसी आशु मलिक ने आजम खां के विरुद्ध बयानबाजी भी की थी। लेकिन यह बात ज्यादा आगे नहीं बड़ी और शांत हो गई। कहीं न कहीं पार्टी के बड़े नेताओं ने इसमें हस्तक्षेप जरूर किया होगा। क्योंकि जवाबदेही में आजम भी किसी से कम नहीं हैं।  

अखिलेश की रथयात्रा के साथ गरीबों की दुआएं : आजम 
 संसदीय कार्य एवं नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां ने अखिलेश यादव की रथयात्रा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही आशीर्वाद दे दिया है। रथयात्रा में शामिल न होने के सवाल पर आजम खां ने पत्रकारों से कहा कि रथयात्रा का मकसद गरीबों की मदद है, और रामपुर में आसरा योजना के आवास आवंटन करने का मकसद भी गरीबों की मदद करना है, इस कार्यक्रम के जरिए भी रथयात्रा के साथ गरीबों की दुआएं रहेंगी। रथयात्रा के माध्यम से मतदाता तक अपनी बात कहना ही मकसद है। रजत जयंती के बारे में पूछने पर कहा कि वह अपने समर्थकों से सरकार  बनाने की अपील करेंगे।
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