बीएचयू राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से ‘राष्ट्र निर्माण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका : यथार्थ और भ्रम’ पर सेमिनार आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि आरएसएस के प्रांत प्रचारक अभय जी ने कहा कि शिक्षित भारत में साक्षर उसे कहते हैं, जो मानव मूल्यों को अमल में लाता हो। संपूर्ण इतिहास एवं संस्कृति के आधार पर संघ ने लोगों को जोड़ने का प्रयास किया।
केएन उडुप्पा सभागार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में कहा कि आजादी के पूर्व से ही संघ ने जन जागरूकता बढ़ाने का काम किया। आरएसएस राष्ट्र का अंग है, राष्ट्र की सेवा के लिए पैदा हुआ। इस अवसर पर जामिया मिलिया इस्लामिया के राजनीति विज्ञान विभाग के हेड प्रो. निसारुल हक ने कहा कि पाकिस्तान में भी एक आरएसएस जैसी संस्था होनी चाहिए।
पाकिस्तान जिस तरह आतंकवाद, गरीबी, सामाजिक विभेद जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में अगर वहां आरएसएस जैसी इस्लामिक संस्था ही सही, बन जाए तो पाकिस्तान बच जाएगा। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि हिंदुत्व के अर्थ को समझने की जरूरत है। सांप्रदायिकता का अर्थ लड़ाई नहीं, सद्भाव और प्रेम है।
अखिल भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के महामंत्री प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि संघ एक परिवर्तन है। इतिहास के परिवर्तन में ही संघ निहित है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य लोगों को जोड़ने और उन्हें मानव मूल्यों से परिचित कराना है।
अतिथियों का स्वागत हेड प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने किया। विषय परिचय प्रो. हेमंत कुमार मालवीय ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एके जोशी ने किया। इस अवसर पर प्रो. आरपी पाठक, प्रो. आरपी सिंह, प्रो. अमरनाथ मोहंती, प्रो. एके उपाध्याय मौजूद रहे।