गंगा घाटों की सफाई करता कर्मचारी।
गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने गंगा टास्क फोर्स के नाम से कंपोजिट इको-टास्क फोर्स की 4 बटालियन बनाने के प्रस्ताव को पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। लेकिन अब गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए सेना के जवानों ने कमर कस ली है। अब पूर्व सैनिकों की सेना गंगा की रक्षा, साफ-सफाई और लोगों को गंगा में कचरा फेंकने से रोकेगी।
भारतीय सेना नौ अधिकारियों और 29 जेसीओ सहित 'गंगा टास्क फोर्स' नामक 532 पूर्व सैनिकों की बटालियन बना रही है। वे इलाहाबाद, वाराणसी और कानपुर में तैनात किए जाएंगे। शुरुआत में 200 कर्मियों को संगठित किया गया है और इलाहाबाद में प्रशिक्षण चल रहा है। गंगा टास्क फोर्स के लिए पर्यवेक्षकों की यह सेना गंगा की साफ-सफाई और रक्षा करेगी साथ ही लोगों को गंगा में कचरा न फेंकने के लिए भी उत्साहित करेगी। सभी पर्यवेक्षक गंगा के प्रमुख घाटों पर गश्त कर लोगों को जागरूक करेंगे। वे इस काम में तीन साल तक लगे रहेंगे।
स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने बताया कि गंगा की सफाई में अधिक से अधिक लोगों को शामिल करने के लिए एक श्रृंखला का हिस्सा ही गंगा टास्क फोर्स के पर्यवेक्षक हैं। गंगा टास्क फोर्स के पर्यवेक्षक भूतपूर्व सैनिक भी मिट्टी के कटाव की जांच, जन जागरूकता पैदा करने, अभियानों में भाग लेने और जैव विविधता संरक्षण तथा नदी प्रदूषण की निगरानी के लिए नदी के किनारों पर वृक्षारोपण आदि करेंगे। उनकी तैनाती आगंतुकों के बीच अनुशासन लाएगी।
मिश्रा ने कहा कि वे स्वच्छ गंगा मिशन के तहत जिला समितियों के साथ काम करेंगे। अधिकारियों ने कहा कि इलाहाबाद में टास्क फोर्स ने करीब एक लाख पौधे और 15 लाख बीज गेंदों की नर्सरी उठाई है। उन्होंने कहा कि वे लोगों को सीवेज सिस्टम से जुड़े घरों को पाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए गैर सरकारी संगठनों के साथ भी काम करेंगे। गंगा का काम शहरी विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, स्वच्छता और पेयजल मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय जैसे अलग-अलग विभाग से भी जुड़ा है, लिहाजा टास्कफोर्स में भी इनकी भागीदारी होगी।