कोरोना संकट में जारी लॉकडाउन के बीच प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे पर शनिवार को पहली बार उत्तर प्रदेश के सांसद और महाराष्ट्र के गृहमंत्री के बीच अधिकृत वार्ता हुई। इससे पहले दोनों सरकार के बीच जो भी विसंगतियां रही हो लेकिन शनिवार को बहुत ही सकारात्मक और सार्थक संवाद हुआ।
वार्ता में यह सवाल उठा कि चुनाव के समय प्रवासियों के वोट के लिए मुंबई में डेरा डालने वाले यूपी के 55 मंत्री आज कहां हैं। क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना संकट में मुंबई के प्रवासियों को लेकर मंत्रियों या सांसदों की कभी कोई बैठक बुलाई।
सांसद रीता जोशी ने इस पर सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा, सीएम योगी ने कोरोना संकट में अपनी पूरी शक्ति लगा दी है। 23 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में आज सिर्फ 4 हजार लोग संक्रमित हैं। पूरी दुनिया कहती है कि संक्रमण में भारत ने अच्छा काम किया है। यूपी सरकार प्रवासियों के लिए गंभीर है।
गृहमंत्री देशमुख ने बताया कि महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा प्रवासी श्रमिक यूपी के हैं। अब तक यूपी के विभिन्न जिलों के लिए 117 श्रमिक विशेष ट्रेनें भेजी जा चुकी हैं। इसके अलावा बिहार के लिए 25, राजस्थान के लिए 9 और झारखंड के लिए 3 ट्रेने रवाना की गई है। वहीं, शनिवार को पहली ट्रेन मुंबई से हाबड़ा के लिए भी रवाना की गई।
महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं। कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद वर्तमान में वह किसी भी पार्टी में नहीं हैं। लेकिन, अब भी उनकी पहचान मुंबई के सबसे बड़े उत्तर भारतीय नेता के रूप में होती है।
कोरोन संकट में प्रवासियों पर आई विपदा में वह शांत नहीं बैठ सके। उन्होंने यूपी के सांसदों और महाराष्ट्र के गृहमंत्री को एकमंच पर लाकर प्रवासियों की घरवापसी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।
मुंबई भाजपा के महामंत्री अमरजीत मिश्र भी प्रवासियों की समस्याओं को लेकर चिंतित रहते हैं। मिश्र ने कहा कि पहले राज्य के पूर्वमंत्री डॉ. राम मनोहर तिवारी मुंबई व आसपास के उत्तर भारतीयों के सर्वमान्य नेता थे। अब उनके बाद कृपाशंकर सिंह उत्तर भारतीय समाज के अगुवा बने हैं।