सब-इंस्पेक्टर उमा शंकर मिश्रा को 38 साल में पहली बार गुरुवार को साप्ताहिक अवकाश मिला। जिसे उन्होंने अपने परिवार के साथ खुशी के कुछ पल बांटने में बिताया। उनकी तरह मध्यप्रदेश के हजारों पुलिसवालों के लिए यह पहला साप्ताहिक अवकाश था। कांग्रेस सरकार ने अपने घोषणापत्र में इसका वादा किया था और सरकार बनाने के तीन हफ्ते बाद इसे पूरा किया।
इससे पहले मध्यप्रदेश पुलिस के लिए हफ्तों के सातों दिन ड्यूटी करना अनिवार्य होता था। उन्हें कैजुअल और पेड लीव मिलती थी लेकिन कोई वीक ऑफ (साप्ताहिक अवकाश) नहीं मिलता था। गुरुवार को सरकार ने अपने घोषणापत्र के वादे को पूरा कर दिया। नए साल पर इस बात की अधिसूचना जारी की गई थी। जिन पुलिसवालों को पहली बार छुट्टी मिली थी वह पिकनिक मनाने, बच्चों के साथ आउटिंग पर गए। कुछ ने बच्चों के साथ समय बिताने के लिए उनके स्कूल की छुट्टी भी करवाई।
हबीबगंज पुलिस थाने में तैनात 56 साल के मिश्रा ने कहा, 'यह काफी शानदार रहा। मैं अपने परिवार के साथ रहा और जितना हो सकता था उतना काम खत्म किया। यह भावना बिलकुल वैसी थी जैसे आपने अपनी पहली छुट्टी ली हो। मैं 1981 में पुलिस सेवा में भर्ती हुआ था और यह पहली बार है जब मुझे साप्ताहिक अवकाश मिला। इससे मुझे तनाव से मुक्ति मिली। आज मेरे पास मेरा पूरा परिवार है। मेरे बेटे बड़े हो चुके हैं और मेरी बहुएं हैं। आज मुझे सच में परिवार के साथ समय बिताकर अच्छा लगा।'
मिश्रा अकेले ऐसे शख्स नहीं हैं जिन्हें कि छुट्टी मिलने से खुशी मिली हो। बैरागढ़ पुलिस थाने में तैनात एएसआई राकेश शर्मा ने कहा कि उन्हें सालों बाद आराम महसूस हुआ। उन्होंने कहा, 'मेरे दो बच्चे हैं और हम अपने पैतृक घर नरसिंहगढ़ गए। हम शुक्रवार तड़के वापस आ जाएंगे। यह मेरा पहला साप्ताहिक अवकाश था। इसलिए बच्चों ने स्कूल की छुट्टी कर ली। यह बहुत अच्छी आउटिंग थी।'
उन्होंने आगे कहा कि पहले पुलिसवालों के लिए यह आसान नहीं होता था क्योंकि उन्हें सुबह के 10 बजे पुलिस थाने पहुंचना होता था। ज्यादातर दिन हम आधी रात को घर वापस आते हैं। कुछ पुलिसवालों का कहना है कि नया नियम उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। डीआईजी धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि विभिन्न पुलिस थानों में तैनात 425 पुलिसवालों को गुरुवार को छुट्टी दी गई थी।