लोकसभा चुनाव से ऐन पहले भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले ने पार्टी पर कई गंभीर आरोप लगातार इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि वह कार्यकाल पूरा होने तक सांसद रहेंगी। सिर्फ पार्टी से इस्तीफा दिया है। सावित्री बाई कुछ सालों में बेहद चर्चित रही हैं। खासतौर पर अपनी ही पार्टी और नेताओं के खिलाफ उनके तीखे बयान उन्हें सुर्खियां दिलाते रहे। उन्होंने कई मौकों पर भाजपा पर इस तरह हमला बोला जिस तरह कोई विपक्षी नेता बोलता है। बहरहाल, सावित्री बाई के भाजपा छोड़ने से पार्टी को कितना नुकसान होगा ये देखने वाली बात होगी। लेकिन उनके इस्तीफे ने एक ऐसे सिलसिले को शुरू कर दिया है जो भविष्य में पार्टी के लिए मुसीबत का पिटारा खोल सकता है।
हाल ही में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के राजस्थान में हनुमान को दलित-वनवासी बताए जाने वाले बयान पर सावित्री ने तीखा बयान दिया था। हनुमान जी को दलित बताए जाने पर उन्होंने कहा कि हनुमान जी दलित थे लेकिन मनुवादियों के खिलाफ थे। तभी राम ने उन्हें बंदर बना दिया।
सावित्री बाई फुले ने अयोध्या में विवादित स्थल पर बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। उन्होंने ने कहा कि अयोध्या बुद्ध की कर्मस्थली है, इसलिए वहां बुद्ध की प्रतिमा स्थापित होनी चाहिए। सावित्री बाई फुले ने विवादित स्थल में हुई खुदाई के दौरान निकले अवशेषों का जिक्र करते हुए कहा कि वह अवशेष बुद्ध से जुड़े हुए थे।
एक कार्यक्रम में सावित्री बाई फुले ने अपनी ही पार्टी की सरकारों को कोसा। उन्होंने कहा कि दलितों की बात करें तो केंद्र की मोदी सरकार व योगी सरकार दलितों के हितों की अनदेखी करती आ रही है। सरकार 10 में एक भी अंक पाने की हकदार नहीं है।
सावित्री बाई फुले ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। सांसद ने कहा कि यह मैं नहीं कह रही बल्कि, देश की सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज को प्रताड़ित किया जा रहा है। आरक्षण खत्म कर संविधान में संशोधन की बात कही जा रही है।
मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर विवाद लेकर उन्होंने मो. अली जिन्ना को महापुरुष करार दिया था। उन्होंने कहा था कि आजादी की लड़ाई में जिन्ना का योगदान था। इसलिए जिन्ना की तस्वीर को जहां भी लगाए जाने की जरूरत है उस जगह पर लगाई जानी चाहिए।
सांसद सावित्री बाई फुले के बोल से भाजपा सरकार की योजनाओं की पोल खुल रही है। सांसद का कहना है कि सरकार की योजनाएं गरीबों तक नहीं पहुंचती, सिर्फ उन्हें झुनझुना पकड़ाया जा रहा है। थोड़ा सा लालच देकर विकास की बात की जाती है, जबकि दलित और गरीब आज भी जैसे-तैसे जिंदगी काट रहा है।
सावित्री बाई फुले ने नेताओं के दलितों के घर भोजन करने को लेकर सवाल उठाए और उनके (नेताओं) इस कृत्य को दलितों का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि ये जो परंपरा चल रही है उसमें दलित वर्ग का सिर्फ अपमान हो रहा है। नेता दलित के घर खाना खाने जाते हैं लेकिन खाना बनाने वाला कोई और होता है, परोसने वाला कोई और। बर्तन टेंट हाउस के होते हैं।
सावित्री बाई को कई मौकों पर भाजपा से चेतावनी भी मिली, लेकिन उनके बगावती तेवर कमजोर नहीं पड़े। अंत में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर हमेशा के लिए भाजपा से नाता ही तोड़ लिया। लेकिन उनके इस्तीफे ने उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।