बगदादी का संगठन मारो, भागो और छुपो की रणनीति के तहत काम करता है। संगठन का मकसद था कि आतंकियों की तलाश में लाखों-करोड़ों रुपये फूंके जाएं। वह काफी हद तक इसमें कामयाब भी रहा। बेल्जियम में हमले के बाद कामकाज ठप पड़ा था और देश को रोजाना 5 करोड़ 30 लाख यूरो का नुकसान हुआ था।
युवाओं की फौज तैयार करने के लिए बगदादी ने युवकों को हूर और जन्नत मिलने के सपने दिखाए थे। कई उसके झांसे में आए, लेकिन धीरे-धीरे असलियत सामने आती गई। हालात यह हैं कि अब उसे जबरन लड़ाकों को कैदी बनाकर रखना पड़ रहा है।