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Jammu-Kashmir: अमरनाथ यात्रा में जारी रहेगा 'ऑपरेशन ऑल आउट', सुरक्षाबलों के हाथ लगी दहशतगर्दों की 'कुंडली'

सार

अमरनाथ यात्रा के दौरान भारतीय सेना का 'ऑपरेशन ऑल आउट' जारी रहेगा। यात्रा के रूट से लेकर पवित्र गुफा तक, ड्रोन और हाई रेंज कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाएगी। सुरक्षा बलों के हाथ दहशतगर्दों की 'कुंडली' लग गई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में जुलाई से 'अमरनाथ यात्रा' शुरु हो रही है। इस बार सुरक्षा बलों ने संख्या बल बढ़ाने की बजाए, 'तकनीक और इंटेलिजेंस' पर ज्यादा फोकस किया है। सूत्रों का कहना है कि घाटी में इस बार अतिरिक्त सुरक्षा बलों की संख्या काफी कम है। सीआरपीएफ की अधिकांश कंपनियां, मणिपुर और पश्चिम बंगाल में लगी हैं। अमरनाथ यात्रा के दौरान भारतीय सेना का 'ऑपरेशन ऑल आउट' जारी रहेगा। यात्रा के रूट से लेकर पवित्र गुफा तक, ड्रोन और हाई रेंज कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाएगी। सुरक्षा बलों के हाथ दहशतगर्दों की 'कुंडली' लग गई है। 'ऑपरेशन ऑल आउट' के दौरान, आतंकियों ने अपनी ना-पाक नजर, यात्रा रूट पर लगाई तो उनका मारा जाना तय है। वजह, जम्मू कश्मीर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने आपसी समन्वय के जरिए आतंकियों को पनाह और हथियार देने वाले ओवर ग्राउंड वर्करों पर शिकंजा कस दिया है। इसमें सुरक्षा बलों को कामयाबी भी मिल रही है। 

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सूत्रों का कहना है, पाकिस्तान के आतंकी संगठन, हर बार अमरनाथ यात्रा में बाधा पहुंचाने का प्रयास करते हैं। इसके लिए उनके तरीके भी अलग-अलग होते हैं। सुरक्षा बलों ने यात्रा के रूट का कई बार सर्वे किया है। इसमें करीब दर्जनभर नए ऐसे प्वाइंट मिले हैं, जहां पर सुरक्षा बढ़ाने की जरुरत थी। वहां पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। इससे पहले पाकिस्तान के आतंकी संगठन, 'जैश-ए-मोहम्मद' और 'लश्कर-ए-तैयबा' अपने गुर्गों के द्वारा यात्रा में बाधा पहुंचाने की कोशिश करते थे। अब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की मदद से जम्मू कश्मीर में इन आतंकी संगठनों के मुखौटे समूह खड़े किए गए हैं। हिज्ब-उल-मुजाहिदीन, अल-बद्र और अल-कायदा जैसे संगठन भी घाटी में सक्रिय होने का दावा करते हैं। इन संगठनों ने भी 'अंडर ग्राउंड वर्कर' (यूजीडब्लू) और 'ओवर ग्राउंड वर्कर' (ओजीडब्लू) तैयार किए हैं। 

सूत्रों के मुताबिक, ये छोटे संगठन, घाटी में नए लड़कों की तलाश रहे हैं। कश्मीर में मौजूदा समय में विदेशी आतंकियों की संख्या लगभग 120 है। इसके अलावा करीब 55 लोकल आतंकी सक्रिय हैं। एनआईए ने अब इन्हीं छोटे संगठनों के सदस्यों पर रेड की है। अमरनाथ यात्रा के दौरान ऐसे कौन संगठन या व्यक्ति हैं, जो आतंकियों को विभिन्न तरीके मदद पहुंचा सकते हैं, उनकी कुंडली हासिल कर ली है। सोमवार को एनआईए की रेड में ऐसे ही युवा टारगेट पर रहे हैं। इनका इंटरनेट पर एक समूह बताया गया है। ये लोग उसी के माध्यम से आतंकियों को हथियार, स्टीकी बम और आईईडी पहुंचाते हैं। सुरक्षा बलों ने घाटी में सक्रिय ऐसे अधिकांश लोगों को पता लगा लिया है। अब दो तरह से आतंकियों पर वार होगा। पहला, 'ऑपरेशन ऑल आउट' तो चल ही रहा है। इसमें अगर किसी आतंकी ने कोई हमला करने का प्रयास किया तो वे मौके पर ही मारे जाएंगे। हालांकि इसकी संभावना बहुत कम है कि आतंकी इस बार अमरनाथ यात्रा पर बुरी नजर डालने की कोशिश करेंगे।
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दूसरा, सुरक्षा बलों ने उन लोगों पर शिकंजा कस दिया है, जो आतंकियों को मदद पहुंचाते हैं। ऐसे लोग अब आतंकियों की सप्लाई चेन नहीं बन सकेंगे। 'लश्कर-ए-तैयबा' की 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ), 'जैश-ए-मोहम्मद' की सक्रिय प्रॉक्सी विंग 'पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट' (पीएएफएफ), यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट जम्मू कश्मीर (यूएलएफजेएंडके), मुजाहिद्दीन गजवत-उल-हिंद (एमजीएच), जम्मू कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स (जेकेएफएफ) और कश्मीर टाइगर्स जैसे आतंकी संगठनों की सप्लाई चेन को काट दिया गया है। अब यूजीडब्लू और ओजीडब्लू, सुरक्षा बलों से नहीं बच सकते। एक अधिकारी के मुताबिक, इस बार यात्रा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल की मांग नहीं की गई है। वजह, घाटी में मौजूद सुरक्षा बलों ने आतंकियों को लेकर जो रणनीति बनाई है, उसमें कोई हमला हो, ऐसी गुंजाइश बहुम कम है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी और जेएंडके की इंटेलिजेंस विंग ने ओजीडब्लू का पता लगाकर आतंकियों के मंसूबों को ध्वस्त कर दिया है।

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