जीआईसी के वैश्विक अध्यक्ष संतोष मंगल ने कहा कि भारत ही 21 वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण कहानी है। यही वजह है कि हम भारत की असीमित संभावनाओं को विश्व के सामने रखेंगे और वैश्विक निवेश, तकनीक और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को भारत में लाएंगे। मंगल ने कहा कि इस मुहिम में लघु, छोटे और मध्यम उद्योगों की बड़ी भूमिका रहेगी।
भारत को 2025 तक पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के उद्देश्य से दुबई में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2021-22 में ग्लोबल इंडिया कोलैबोरेटिव (जीआईसी) का लोकार्पण हुआ। जीआईसी के वैश्विक अध्यक्ष संतोष मंगल और भारत अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला के नेतृत्व में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
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जीआईसी के वैश्विक अध्यक्ष संतोष मंगल ने कहा कि भारत ही 21 वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण कहानी है। यही वजह है कि हम भारत की असीमित संभावनाओं को विश्व के सामने रखेंगे और वैश्विक निवेश, तकनीक और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को भारत में लाएंगे। मंगल ने कहा कि इस मुहिम में लघु, छोटे और मध्यम उद्योगों की बड़ी भूमिका रहेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्लोबल इंडिया कोलैबोरेटिव (जीआईसी) उद्योगपतियों, उद्यमियों, नीति निर्माताओं एवं मीडिया कर्मियों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को दुबई वर्ल्ड एक्सपो 2021-22 ले गया था। जीआईसी का उद्देश्य था कि एमएसएमई यहां नई तकनीकों को देखने के बाद व्यापार प्रसार की संभावनाओं को तलाश सके। बकौल मंगल, जीआईसी अगले कुछ महीनों में अमेरिका, सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम में भी अपने चैप्टर खोलने जा रहा है।
जीआईसी के भारत अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कंपनी के नौ विषयों के बारे में बताते हुए कंपनी की दूरगामी नीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीआईसी खास कार्यक्रम करेगा और नौ क्षेत्रों में गठबंधन एवं प्रोत्साहन को बढ़ावा देगा ताकि भारतीय उद्यमियों के हौसले बुलंद हो और वे नई ऊंचाइयों को छूएं। इसके लिए उद्योग, शिक्षा, न्याय, स्वास्थ्य, सामाजिक विकास, पर्यावरण, मीडिया, शुचिता और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
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दुबई प्रतिनिधिमंडल में शामिल पीपुल्स सार्क के अध्यक्ष वेद प्रताप वैदिक ने लोकार्पण समारोह में बोलते हुए कहा कि भारत इतिहास में विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है। अब समय वो करवट ले रहा है कि भारत वापस सोने की चिड़िया बनेगा। जीआईसी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारत फार्मास्यूटिक्ल सहित कई क्षेत्रों में बहुत अच्छा काम कर सकता है, लेकिन इसके लिए एक दूरगामी योजना की जरूरत है। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े बदलावों की जरूरत है, जिसका अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किया था।