दीपावली पर सुख और समृद्धि के प्रतीक के रूप में चांदी के सिक्के खरीदने का प्रचलन है। तमाम सराफा कारोबारी इस बात का दावा करते हैं कि बाजार में ब्रिटिश काल में चलन में रहे चांदी के सिक्के आज भी उपलब्ध हैं। लोग दीपावली पर इन्हीं सिक्कों को खरीदने में प्राथमिकता देते हैं, लेकिन इन दिनों शहर में बड़ी तादाद में नकली सिक्के तैयार किए जा रहे हैं। जानकारी के अभाव में लोग ठगे जा रहे हैं। यहीं नहीं लक्ष्मी और गणेश की आकृति वाले नकली सिक्के भी बड़ी संख्या में बाजार में उपलब्ध हैं।
शहर में तैयार किए जा रहे नकली सिक्के बड़ी तादात में एनसीआर और दिल्ली समेत देश के अन्य जिलों के सराफा बाजार में सप्लाई किए जा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में पूरी तरह मौन हैं, जबकि इन सिक्कों को ढालना पूरी तरह से अवैध है। शहर में छावनी क्षेत्र स्थित केले वाली कोठी में बड़ी तादात में चांदी के नकली सिक्के बनाने का कारोबार हो रहा है। सूत्रों के अनुसार नकली सिक्कों के अधिकांश कारोबारियों को किसी न किसी तरह से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में पुलिस भी इन पर कार्रवाई करने से कतराती है। ब्रिटिशकालीन सिक्कोें पर तत्कालीन ब्रिटिश राजाओं के चित्र अंकित होते थे, नकली सिक्कों पर इन राजाओं का चित्रण भी गलत तरीके से किया गया है। मसलन 1857 में ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया थीं, लेकिन चांदी के नकली सिक्कों पर आपकों किंग जार्ज का चित्र भी मिल सकता हैं।