डीसीपी नॉर्थ के अनुसार, इंद्रलोक का एक पुराना वीडियो वायरल किया गया है। इसे दिल्ली की हिंसा से जोड़ दिया गया है। पुलिस ने जब इस वीडियो की जांच की तो पता चला कि यह बहुत पुराना वीडियो है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि इंद्रलोक में लोगों की भारी भीड़ एकत्रित हो रही है। कानून व्यवस्था के भंग होने का खतरा पैदा हो गया है।
लोगों में भय का माहौल है। पुलिस के मुताबिक, इंद्रलोक में पूरी तरह से शांति है। यहां दंगे जैसी कोई घटना नहीं हुई है। कहीं पर भी लोग जमा नहीं हुए हैं। दूसरा वीडियो भी दिल्ली हिंसा का बताकर उसे वायरल किया जा रहा है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि एक सड़क पर बहुत से युवकों की भीड़ बस चालक पर हमला कर रही है।
बस के शीशे तोड़ दिए गए। ड्राइवर को बाहर खींचा जा रहा है। बस के सामने एक लाल रंग की गाड़ी आकर रूकती है। चारों तरफ शोर मच रहा है। पीआईबी ने बुधवार सुबह इस वीडियो को रिलीज कर बताया है कि यह फेक वीडियो है। जब इस वीडियो की पड़ताल की गई तो पता चला कि वह दिल्ली हिंसा से जुड़ा वीडियो नहीं था। ड्राइवर के साथ मारपीट का वह वीडियो पुणे का था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इस तरह के फेक वीडियो या हिंसा से जुड़ी सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और साइबर विंग फेक वीडियो के जरिए अफवाहें फैला रहे लोगों की सूची तैयार कर रही है।
मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली हिंसा को लेकर जो समीक्षा बैठक की थी, उसमें अफवाहों और फेक वीडियो पर सबसे ज्यादा ध्यान देने के लिए कहा गया था। कई उपद्रवी, देश के दूसरे भागों में बहुत पहले हुई हिंसा के वीडियो और फोटो को दिल्ली का बताकर सोशल मीडिया में वायरल कर रहे हैं।