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दंगों के वीडियो वायरल करने वाले अब नहीं बचेंगे, हो सकती है जेल!

Wed, 26 Feb 2020 08:32 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फेक वीडियो वायरल करने वालों का अकाउंट बंद करने के लिए भी कहा गया है। दिल्ली पुलिस ने ऐसे कई वीडियो की जांच कर उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हटवा दिया है।
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जाफराबाद में फायरिंग करता उपद्रवी ( लाल रंग के शर्ट में) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में हिंसा फैलाने के लिए उपद्रवी अब सोशल मीडिया में दंगों के पुराने वीडियो वायरल कर रहे हैं। कई वीडियो तो ऐसे हैं, जिनका दिल्ली से कोई लेना देना ही नहीं है। वे किसी दूसरे राज्य में हुई घटना के वीडियो हैं। दिल्ली पुलिस एवं केंद्रीय एजेंसियां अब ऐसे वीडियो सोशल मीडिया में डालने वालों पर कड़ी नजर रख रही हैं।

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पुलिस ऐसा करने वाले करीब दो दर्जन लोगों पर बहुत जल्द कार्रवाई कर सकती है। दिल्ली पुलिस की साइबर विंग और स्पेशल सेल ऐसे लोगों की सूची तैयार कर रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म को भी लिखा गया है कि वे ऐसे किसी भी वीडियो को आगे न बढ़ायें।

साथ ही फेक वीडियो वायरल करने वालों का अकाउंट बंद करने के लिए भी कहा गया है। दिल्ली पुलिस ने ऐसे कई वीडियो की जांच कर उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हटवा दिया है।
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डीसीपी नॉर्थ के अनुसार, इंद्रलोक का एक पुराना वीडियो वायरल किया गया है। इसे दिल्ली की  हिंसा से जोड़ दिया गया है। पुलिस ने जब इस वीडियो की जांच की तो पता चला कि यह बहुत पुराना वीडियो है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि इंद्रलोक में लोगों की भारी भीड़ एकत्रित हो रही है। कानून व्यवस्था के भंग होने का खतरा पैदा हो गया है।

लोगों में भय का माहौल है। पुलिस के मुताबिक, इंद्रलोक में पूरी तरह से शांति है। यहां दंगे जैसी कोई घटना नहीं हुई है। कहीं पर भी लोग जमा नहीं हुए हैं। दूसरा वीडियो भी दिल्ली हिंसा का बताकर उसे वायरल किया जा रहा है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि एक सड़क पर बहुत से युवकों की भीड़ बस चालक पर हमला कर रही है।

बस के शीशे तोड़ दिए गए। ड्राइवर को बाहर खींचा जा रहा है। बस के सामने एक लाल रंग की गाड़ी आकर रूकती है। चारों तरफ शोर मच रहा है। पीआईबी ने बुधवार सुबह इस वीडियो को रिलीज कर बताया है कि यह फेक वीडियो है। जब इस वीडियो की पड़ताल की गई तो पता चला कि वह दिल्ली हिंसा से जुड़ा वीडियो नहीं था। ड्राइवर के साथ मारपीट का वह वीडियो पुणे का था।
 

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इस तरह के फेक वीडियो या हिंसा से जुड़ी सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और साइबर विंग फेक वीडियो के जरिए अफवाहें फैला रहे लोगों की सूची तैयार कर रही है।

मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली हिंसा को लेकर जो समीक्षा बैठक की थी, उसमें अफवाहों और फेक वीडियो पर सबसे ज्यादा ध्यान देने के लिए कहा गया था। कई उपद्रवी, देश के दूसरे भागों में बहुत पहले हुई हिंसा के वीडियो और फोटो को दिल्ली का बताकर सोशल मीडिया में वायरल कर रहे हैं।

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दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट और केंद्रीय एजेंसियां अब ऐसे वीडियोज की पड़ताल कर रही हैं।

 

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