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पूर्वी दिल्ली: सीलिंग-नोटबंदी और गुटबंदी से भाजपा बेहाल, आप की योजनाओं से सिसोदिया की राह आसान

Wed, 22 Jan 2020 02:40 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • गांधीनगर और कृष्णानगर पर कांग्रेसी दिग्गजों के उतरने से मुकाबला हुआ रोचक 
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manish sisodia - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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राजधानी दिल्ली का पूर्वी इलाका पूर्वी दिल्ली के नाम से जाना जाता है। इस इलाके में व्यापारी और प्रवासी मजदूरों की भारी संख्या निवास करती है। गांधीनगर कपड़ा व्यवसाय के लिए पूरी देश में विख्यात है, तो विश्वासनगर और शहादरा एल्युमिनियम-तांबे के स्क्रैप के बिजनेस के लिए जाना जाता है।

व्यापारियों के हब वाले इस क्षेत्र में पिछले दिनों अवैध इमारतों पर खूब सीलिंग हुई है, जिसके कारण व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। नोटबंदी के कारण यहां का व्यापार चौपट हुआ है, तो व्यापार में मंदी के कारण नौकरियों के अवसरों में भारी कमी आई है। जाहिर है कि मतदाता चुनाव में अपना गुस्सा उतारने को तैयार है। 

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इन्ही मुद्दों के चलते भाजपा को यहां नुकसान उठाना पड़ सकता है. तो वहीं भाजपा नेताओं की गुटबंदी और गलत टिकट वितरण ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। भाजपा का दावा है कि उसने जनता को सीलिंग से निजात दिलाने के लिए काम किया है, लेकिन जनता के बीच उसका यह तर्क किसी के पल्ले पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है। 

कांग्रेस यहां कृष्णानगर और गांधीनगर सीट पर मजबूत मानी जा रही है क्योंकि उसके दो मजबूत, स्वच्छ छवि के नेताओं ने यहां से अपनी दावेदारी पेश की है, तो आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को अरविंद केजरीवाल सरकार की मुफ्त योजनाओं का लाभ मिलता दिख रहा है।

किसके सामने कौन  

पूर्वी दिल्ली (या यमुना पार) के इस इलाके में विधानसभा की दस सीटें हैं। इस एरिया में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के कारण पटपड़गंज सीट सबसे ज्यादा दिलचस्प मानी जा रही है। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में खूब काम किया है और मोहल्ला क्लिनिक, सड़कों, नालियों-गलियों के खूब काम किये हैं। वहीं भाजपा ने उनके सामने रवि नेगी को तो कांग्रेस ने लक्ष्मण रावत को मैदान में उतारा है।

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ये दोनों ही उम्मीदवार विधानसभा चुनाव में पहली बार उतरे हैं। यही कारण है कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के सामने उन्हें हल्के उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है।

पूर्वी दिल्ली की शहादरा सीट भी आप के दिग्गज नेता रामनिवास गोयल के कारण काफी प्रतिष्ठित हो गई है। उन्हें आम आदमी पार्टी की योजनाओं का लाभ मिल सकता है, तो कांग्रेस के पुराने नेता नरेंद्र नाथ उन्हें अच्छी टक्कर दे सकते हैं।

भाजपा ने इस सीट पर संजय गोयल को मैदान में उतारा है, लेकिन इस व्यापारी नेता को व्यापार की मंदी की मार झेलनी पड़ सकती है।  

लक्ष्मीनगर विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के वर्तमान विधायक नितिन त्यागी उम्मीदवार हैं। उनके सामने भाजपा ने अभय कुमार वर्मा और कांग्रेस ने हरिदत्त शर्मा को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के होल्ड वाली इस सीट पर पिछले दो विधानसभा चुनाव से आम आदमी पार्टी ने कब्जा जमा लिया है। इस बार भी नितिन त्यागी यहां से मजबूत उम्मीदवार के तौर पर देखे जा रहे हैं।

आम आदमी पार्टी ने विश्वास नगर की सीट पर सिंगला स्वीट्स के नाम से प्रसिद्ध दुकान चलाने वाले व्यापारी दीपक सिंगला को मैदान में उतारा है। उन्हें यहां से बेहद मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा के वर्तमान विधायक ओम प्रकाश शर्मा की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है, लेकिन केंद्र सरकार की नोटबंदी जैसी नीतियों के कारण व्यापारी वर्ग में छाई नाराजगी उन्हें भारी पड़ सकती है।

वहीं कांग्रेस उम्मीदवार गुरुचरण सिंह राजू भी सिख और व्यापारी वोटों पर अपनी पकड़ के कारण दोनों ही उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

मुस्लिम बाहुल्य वाले इलाके ओखला सीट पर चुनावी लड़ाई अभी से लगभग एक तरफा मानी जा रही है क्योंकि आम आदमी पार्टी ने यहां से अपने वर्तमान विधायक अमानतुलाह को मैदान में उतारा है। स्कूलों, मोहल्ला क्लिनिक के काम और एनआरसी पर उनके स्टैंड ने यहां के वोटरों में उनके लिए खास जगह बनाई है जो उन्हें फायदा पहुंचा सकती है।

हालांकि कांग्रेसी उम्मीदवार और पूर्व विधायक रह चुके परवेज हाशमी भी यहां के जमीनी नेता हैं और उन्हें भी मजबूत उम्मीदवार माना जाता है, लेकिन अमानतुलाह को वे कितनी टक्कर दे सकेंगे, यह देखने वाली बात होगी। भाजपा ने यहां से ब्रह्म सिंह को टिकट दिया है।

कृष्णा नगर सीट भाजपा के केन्द्रीय मंत्री डोक्टर हर्षवर्धन की सीट मानी जाती है। भाजपा ने यहां से अनिल गोयल को मैदान में उतारा है। लेकिन कांग्रेसी दिग्गज डॉ. अशोक कुमार वालिया के इस सीट से मैदान में आने से यहां की लड़ाई भाजपा के लिए कठिन हो गई है।

अशोक कुमार वालिया बेहद साफ-सुथरी छवि वाले नेता माने जाते हैं और उन्होंने अपने क्षेत्र में बेहतर काम भी किया है। यहां के जमीनी नेता होने के कारण उन्हें इसका लाभ मिल सकता है। आम आदमी पार्टी ने यहां से एसके बग्गा को टिकट दिया है।

गांधी नगर सीट पर कांग्रेसी दिग्गज अरविंदर सिंह लवली मैदान में हैं। पिछले चुनाव हारने के बाद इस बार उन्हें यहां के सबसे प्रबल दावेदार बताया जा रहा है। बेहद शांत, व्यवसायी और सिख होने का फायदा लवली को हमेशा से मिलता रहा है।

भाजपा ने इस सीट पर आम आदमी पार्टी से बागी हुए अनिल वाजपेयी को मैदान में उतारा है। उन्हें यहां के भाजपा कार्यकर्ताओं का भारी विरोध झेलना पड़ रहा है जो चुनाव में उन पर भारी पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी ने इस बार इस सीट पर नवीन चौधरी उर्फ दीपू को मौका दिया है।

जंगपुरा से आप प्रत्याशी प्रवीण कुमार, भाजपा उम्मीदवार इम्प्रीत सिंह बख्शी और कांग्रेस उम्मीदवार तलविंदर सिंह मारवाह में तिकोनी लड़ाई मानी जा रही है। प्रवीण कुमार की ताकत आम आदमी पार्टी की योजनाएं हैं तो भाजपा के उम्मीदवार को सिख होने का लाभ मिल सकता है।

त्रिलोकपुरी सीट पर आप उम्मीदवार रोहित कुमार महरौलिया और भाजपा उम्मीदवार किरण वैद में कांटे की लड़ाई मानी जा रही है, हालांकि दलित और मुस्लिम समुदाय की बहुलता वाले इस इलाके में आप उम्मीदवार को बढ़त मिल सकती है।

वहीं किरण वैद को पूर्वांचली वोटरों का बेहतर दावेदार बताया जा रहा है। कोंडली सीट (एससी सीट) पर आप उम्मीदवार कुलदीप कुमार मोनू और भाजपा उम्मीदवार राजकुमार ढिल्लन में लड़ाई है, तो अमरीश सिंह गौतम अपनी पुरानी छवि के आधार पर मतदाताओं को अपनी तरफ मोड़ने में लगे हैं।

 

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