बच्चे को जरा सी खरोच भी आ जाए तो मां का कलेजा मुंह को आ जाता है, जरा सोचिए उस मां पर क्या गुजरी होगी जिसके आठ बच्चों को उसी के सामने एक-एक मार दिया गया हो?
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जाहिर है बच्चों के बिना इस दुनिया की हर नेमत मां को संताप के सागर से नहीं उबार सकती। आखिर मां तो मां होती है, इंसान की हो या बेजुबान जानवर की।
अम्मू भी एक बदकिस्मत मां है। बेंगलुरु की कृष्णानगर सोसायटी की गलियां और नालियां अम्मू का घर हैं। आलीशान घरों में पलने वाले कुछ नसीब वाले बेजुबानों की जूठन अम्मू का खाना है। घरों से न मिले तो सड़क और कूड़े में जो मिला वहीं इसका निवाला।
हाल ही में अम्मू ने आठ पिल्लों को जन्म दिया। लेकिन एक और दूसरी मां ने इस मां को जिंदगी भर का गम और अफसोस दे दिया। उस मां ने इस मां के आठ बच्चों को पत्थर पर दे मारा। फर्क इतना है कि एक इंसान है और एक बेजुबान।
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'कुत्तों को सबक सिखाने के लिए मारा'
आरोपी पोनम्मा
- फोटो : indiatimes
बेहद दर्दनाक वारदात में मौत पिल्लों की हुई है, लेकिन इलाके के लोग दुख की घड़ी में अम्मू के साथ है। लोग और एनजीओ अम्मू को इंसाफ दिलाने के लिए आगे आए हैं।
इंडिया टाइम्स की खबर के मुताबिक पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर जमानत पर रिहा भी कर दिया है। लेकिन मुकदमा पशु हिंसा की संगीन धाराओं में दर्ज किया गया है। इंसाफ हुआ तो आरोपी को तकरीबन पांच साल सलाखों के पीछे गुजराने होंगे।
अम्मू के पिल्लों की हत्या करने का आरोप सोसायटी की पोनम्मा पर है। पोनम्मा एक पूर्व मानद फ्लाइट लेफ्टिनेंट की पत्नी हैं। पोनम्मा से जब मीडिया ने पिल्लों को मारने का कारण पूछा तो अजीब वजह सामने आई। पोनम्मा ने बताया कि वो कुतिया को सबक सिखाना चाहती थी, ताकि फिर से उसके गेट की नाली के पास पिल्लों को जन्म न दे।
बेजुबानों की हत्या के बाद गुस्साए लोगों ने एक गैर सरकारी संस्था कोमापैशन अनलिमिटेड प्लस एक्शन के साथ पीनिया थाने में पोनम्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
चश्मदीदों की मानें तो पोनम्मा के घर के गेट पास नाली से सटी जगह पर अम्मू ने पिल्लों को जन्म दिया था। लेकिन पोनम्मा को ये पसंद नहीं था कि कोई कुत्ता उसके घर के आस-पास भी भटके। गुस्से से आगबबूला पोनम्मा ने अम्मू के सामने ही उसके पिल्लों के उठाया और एक-एककर बड़े से पत्थर पर इतनी जोर से दे मारा कि कुछ की तो अंतड़िया तक बाहर आ गईं।
बच्चों को मरता देख बिलबिलाई अम्मू सोसायटी में इधर-उधर भागी ताकि कोई आकर उसके बच्चों को बचा सके, लेकिन जब तक लोगों की भीड़ जुटती, उसके सात पिल्ले दुनिया से रुख्सत हो चुके थे, एक उस क्रूर महिला के हमले को कुछ झेल सका, लेकिन अगले दिन उसने ने भी दम तोड़ दिया।
इंसानों की तरह अम्मू का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वो अपने पिल्लों की कब्रों के पास जाती है। अपने पंजों से कब्रों को खोदने की कोशिश करती है, उसे शायद अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि उसके बच्चे दुनिया छोड़ चुके हैं।
आखिर में थक-हारकर दुखियारी अम्मू पिल्लों की कब्र के पास मुंह लटकाकर बैठ जाती है।
हो सकता है कि वहां से गुजरने वाले लोगों को उसकी वेदना न दिखे, लेकिन एक मां अगर नजर भर के उसके चेहरे को देख ले समझ सकती है कि आंख के तारों के अचानक ओझल हो जाने क्या होता है।