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हाई प्रोफाइल बाबा का कत्ल, कभी बसपा के लिए लड़ चुके थे चुनाव

Mon, 27 Feb 2017 03:47 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, आगरा
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उत्तर प्रदेश के आगरा में नरि के आश्रम में कम ही लोग थे और वहां मरम्मत का काम चल रहा था। आश्रम के बाबा मुंशीदास निषाद टहल रहे थे, तभी तीन युवक बाइक से वहां पहुंचे। उन्होंने गेट पर बताया, मरीज हैं, बाबा से दवा लेने आए हैं। उन्हें देखकर बाबा बैठ गए।
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पूछा क्या परेशानी है, एक बोला, पथरी है किडनी में, दवाई चाहिए। वह आगे बढ़ा और बाबा के पैर छुए। बाबा ने आशीर्वाद दिया और नाम लिखवाने के लिए कहा। 

वह बोला, मैं राजू हूं, फिरोजाबाद से आया हूं। तभी उसके ठीक पीछे खड़े युवक ने अंटी से तमंचा निकाला। बाबा के ठीक सामने आया। सीने पर निशाना लगाया और ट्रिगर दबा दिया। गोली लगने से बाबा घायल होकर गिर पड़े।
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हॉस्पिटल में समर्थकों की उमड़ी भीड़

उन्हें आगरा के शहीद नगर स्थित एक हॉस्टिपल में ले जाया गया। वहां आश्रम में भीड़ जमा हो गई। बाबा के समर्थक पहुंच गए। बाबा से दवाई लेने वाले लोग आस पास के इलाके में भी बड़ी संख्या में है। जिसने भी सुना, आश्रम पहुंच गया।

बाबा को गोली मारने केबाद तीनों हमलावर बाइक से आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस वे की ओर भागे। दो ने बाइक पर भी तमंचे हाथ में ले रखे थे। किसी ने उनका पीछा करने की कोशिश नहीं की। एक्सप्रेस वे पर उन्हें फतेहाबाद की ओर जाते हुए देखा गया।

पुलिस ने चश्मदीदों के हवाले से बताया कि हमलावरों ने जींस पहन रखी थी। उन्हें भागते हुए देखा गया। दो ने स्वेटर भी पहन रखा था। डर के मारे लोग नजदीक नहीं गए। कोई उनकी बाइक का नंबर भी नोट नहीं कर पाया था।
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बाबा की कुंडली में डकैती से लेकर हत्या तक के अपराध

- फोटो : demo pic
बाबा मुंशी दास ने 1993 में सपा बसपा गठबंधन के दौरान फतेहाबाद विधान सभा से बसपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था। बाबा मुंशीदास निषाद का नाम पुलिस के रिकार्ड में हिस्ट्रीशीटर अपराधियों के रूप में दर्ज है। जितनी तेजी से उसका आश्रम बढ़ रहा था, उतनी ही रफ्तार से उसके खिलाफ मुकदमों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही थी।

हत्या का प्रयास, हत्या, डकैती, सरकारी काम में बाधा, रेप का प्रयास, बलवा जैसी धाराओं में केस दर्ज हैं। पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की। शायद ही कोई साल बीता हो जब हिस्ट्रीशीट में एक या इससे अधिक केस न बढ़े हों। उस पर जमीन पर कब्जों के आरोप लगे, मुकदमे दर्ज हुए लेकिन बाबा रूका नहीं। आश्रम फैलता ही चला गया। उस पर यमुना में रेत खनन कराने के भी आरोप लगे।

पुलिस ने बताया कि उसके खिलाफ सबसे ज्यादा केस डौकी थाना में ही दर्ज हैं। ये आश्रम के विस्तार के चक्कर में दर्ज हुए। इनसे पता चलता है कि उसके रास्ते में जो आया, उसने उसे बख्शा नहीं। जिसने जमीन राजी से दी, उससे ले ली। जिसने नहीं दी, उसे सबक सिखा दिया। जयराम का भी ऐसा ही मामला बताया गया है। बाबा उसकी जमीन पर कब्जा करना चाहता था। उसने विरोध किया। इसके बाद उसकी हत्या हो गई। 
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