दो हफ्ते पहले 20 साल की एक नेत्रहीन लड़की के साथ कथित गैंगरेप की घटना से दुखी चाचा ने करोलबाग में पेड़ से लटककर फांसी लगा ली। मृतक जीवनयापन के लिए रिक्शा चलाता था। वह अपने घर के साथ ही पीड़िता और उसकी 55 साल की मां की कमाई का इकलौता जरिया था। गुरुवार को पीड़िता ने कहा कि वह गैंगरेप केस को वापस लेकर उत्तर प्रदेश के अपने गांव वापस जाना चाहती है क्योंकि उसके परिवार में कोई ऐसा शख्स नहीं बचा है जो इतनी लंबी कानूनी लड़ाई लड़ सके।
पुलिस हालांकि इस कथित आत्महत्या पर कुछ नहीं कह रही है। मगर
नेत्रहीन पीड़िता का कहना है कि उसके 45 साल के चाचा उसके साथ हुई घटना की वजह से सदमे में थे और हर रात काम से लौटने के बाद रोया करते थे। पड़ोसियों का कहना है कि मृतक पुलिस से नाराज था क्योंकि उसने केवल एक आरोपी को पकड़ा और बाकियों को छोड़ दिया। जबकि पीड़िता का कहना है कि उसका दो-तीन लोगों ने गैंगरेप किया था। पीड़िता ने एक आरोपी को आवाज से पहचाना। उसका कहना है कि बाकी आरोपियों ने कुछ नहीं बोला था, जिस वजह से वह उन्हें पहचान नहीं पाई।
पीड़िता ने कहा- हर रात मेरे चाचा शराब पीकर मेरे साथ जो हुआ उसकी वजह से रोया करते थे। वह हर बार पुलिस स्टेशन जाया करते थे। वह बलात्कार में शामिल सभी लोगों को सजा दिलवाना चाहते थे। मगर पुलिस का कहना था कि केवल एक शख्स ने इस घटना को अंजाम दिया था। पीड़िता की मां ने कहा, वह खाना खाकर सोने के लिए चले गए थे। जब मैं सुबह 5 बजे घर से बार निकली तो मैंने उन्हें पेड़ की एक ऊंची डाल से लटकते हुए पाया। हम सभी चीज के लिए उनपर निर्भर थे। हमारे घर में वही एक शख्स थे जो फोन कर सकते थे। मैं और मेरी बेटी 100 नंबर तक डायल नहीं कर सकते हैं।