तेलंगाना के नालगोंडा जिले के लिंगाराजपल्ली गांव का सबसे बड़ा घर तुम्मला श्रीनिवास रेड्डी का है। वह एक बड़े किसान हैं, बहुत सारी संपत्ति के मालिक है और टीडीपी के पूर्व मंडल अध्यक्ष के रूप में काफी ताकतवर है। दूसरी ओर वेंकटैया पिछड़ी जाति का मुंबई में एक ढाबेवाला।
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दोनों परिवारों के बीच की गहरी खाई काफी हद तक रेड्डी की बेटी टी स्वाती की मौत और दामाद अंबोजी नरेश के गायब होने का सच बयां करती है। वह 21 साल की थी और वह 23 साल का।
पुलिस ने रेड्डी से अब तक दो बार पूछताछ की है। हर बार ये बात सामने आई है कि दोनों ने रेड्डी की इच्छा के खिलाफ जाकर 25 मार्च को शादी कर ली थी। रेड्डी द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद दोनों लिंगाराजपल्ली वापस लौट आए। बता दें नरेश और स्वाति की मुलाकात वालीगोंडा के प्रगति कॉलेज में हुई, जहां दोनों पढ़ाई करते थे।
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वेंकेटैया मुंबई के सायन कोलीवाड़ा में अपनी पत्नी इंदिरम्मा के साथ रहते हैं, लेकिन उनके पिता और भाई परिवार के मूल निवास पालेराला गांव में रहते हैं जबकि नरेश हॉस्टल कैंपस में रहता था।
नरेश के परिवार का कहना है कि वे नरेश और स्वाति के बीच पनप रहे प्यार से अनजान थे। जब दोनों ने शादी का फैसला लिया तब उन्हें इस बात की जानकारी हुई। वे मुंबई गए, गेटवे ऑफ इंडिया के पास एक होटल में रहे और 25 मार्च को अपनी शादी रजिस्टर करवाई। इसके बाद स्वाति एंटॉपहिल पुलिस स्टेशन पहुंची और वहां के एसएचओ को बताया कि उसे अपने पिता से जान का खतरा है। उसने बताया एक पिछड़ी जाति के लड़के से शादी को उसके पिता कभी स्वीकार नहीं करेंगे। इसके बाद एसएचओ ने स्वाति के पिता को पुलिस स्टेशन बुलाया।
नरेश के पिता वैंकेंटैया ने बताया वह डर गए थे। उन्होंने कहा कि मैं वहां गया था लेकिन मैंने उन्हें आशीर्वाद भी नहीं दिया क्योंकि मुझे पता था कि दोनों ने गलती की है। बाद में ये बड़ी परेशानी का कारण बनेगा। हमारे गांव में जाति बड़ा मुद्दा है, और अगर एक निचली जाति का व्यक्ति ऊंची जाति की महिला से शादी करता है, तो ये परेशानी का कारण तो बनता ही है। मैंने पुलिस को समझाने की कोशिश की कि वे लड़की के पिता को बुलाकर उसे उन्हें सौंप दें। लेकिन पुलिस ने कहा कि दोनों व्यस्क हैं इसलिए शादी करने के लिए स्वतंत्र हैं। मैंने स्वाति को भी समझाने की कोशिश की कि वह अपने घर वापस लौट जाए, लेकिन पुलिस ने मुझे पुलिस स्टेशन से बाहर खदेड़ दिया।
घर वापस आकर फिर भाग निकले स्वाति और नरेश
वेंकटैया और उनकी पत्नी
- फोटो : indian express
डरे वेंकटैया ने दंपति को सायन कोलीवाड़ा में अपने एक कमरे के घर में रहने देने से इंकार कर दिया। इसके बाद दंपति पास में ही एक सस्ते मकान में रहने लगे। वेंकटैया ने बताया कि अगले दिन उन्होंने फिर स्वाति को घर वापस लौट जाने के लिए समझाया। उसने अपने पिता को फोन किया और उन्हें शादी के बारे में बताया। मुझे पहले ही गांव से दंपति को वापसे भेजने के लिए बहुत सारे फोन मिल रहे थे। श्रीनिवास रेड्डी ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, पुलिस ने मेरे भाई और उनके बेटों से आत्माकुर पुलिस स्टेशन आने को कहा। पूरे दिन उनसे पूछताछ की गई।
वेंकटैया ने दावा किया है कि ऐसा करना इस बात का इशारा था कि जब तक उनकी बेटी वापस नहीं लौटेगी, उनके भाई-भतीजे को नहीं छोड़ा जाएगा। स्वाति को झुकना पड़ा और 28 मार्च को वेंकटैया ने एसयूवी बुक किया और वे रामन्नपेट गांव गए, जहां उनकी सबसे बड़ी बेटी रहती थी। ये जगह लिंगराजपल्ली से 20 किलोमीटर दूर है।
वेंकटैया ने बताया कि रामन्नपेट सर्कल इंस्पेक्टर एन श्रीनिवास की उपस्थिति में रेड्डी रामन्नपेट पुलिस स्टेशन से स्वाति को वापस ले गए जबकि वह बेटे नरेश के साथ घर वापस लौट आए।
रामन्नपेट के इंस्पेक्टर एन श्रीनिवास ने यह स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने केवल इस वजह से इस मामले में हस्तक्षेप किया था क्योंकि वेंकटैया डरे हुए थे। उन्होंने कहा स्वाति अपने पिता के साथ गई और नरेश अरने पिता के साथ। रेड्डी ने बताया कि लोगों की बातचीत की वजह से उन्होंने स्वाति को उसकी विवाहित बहन के पास रहने के लिए भेज दिया था। उसके सेकेंड ईयर की परीक्षा 1 अप्रैल से शुरू होने वाली थी।
उन्होंने बताया कि मैंने स्वाति से जो भी हुआ उसे भूल जाने के लिए कहा। मैंने कहा कि वहां कुछ दिन बिताओ, वापस आओ और परीक्षा दो। लेकिन वो 31 मार्च को अपने बहन के घर से गायब हो गई।
वेंकटैया ने ये स्वीकार किया कि 1 अप्रैल को स्वाति मुंबई वापस आ गई थी और नरेश उसके साथ चला गया। उन्होंने बताया कि मुझे नहीं पता कि उसने नरेश से कैसे संपर्क किया था क्योंकि नरेश के पास तो मोबाइल फोन भी नहीं था। 2 अप्रैल को दंपति ने बताया कि उन्हें रहने के लिए घर मिल गया है। मुझे अब भी नहीं पता है कि वे कहां रहते थे। नरेश काम नहीं करता था इसलिए मुझे नहीं पता कि वे अपना काम चला रहे थे।
ठीक एक महीने बाद 1 मई को स्वाति ने वेंकटैया को फोन किया और अपनी खराब दशा के बारे में बताया। उनके पास न तो पैसे थे और न राशन, यहां तक की उन्होंने कमरे का किराया भी नहीं दिया था। उसने मुझे बताया कि वे विक्रोली में कुछ मलिन बस्तियों में रह रहे थे। मैंने उनसे मिला, राशन खरीदा और उन्हें किराए के लिए 6,000 रुपये और अन्य खर्चों के लिए 1,500 रुपये दिए।
रेड्डी ने बताया कि 2 मई को स्वाति ने उन्हें फोन करके बताया कि वे वापस घर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि नरेश अपने दादा-दाती के घर चला गया और वह स्वाति को घर ले आए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने उन्हें सलाह दी कि अगर वह नरेश के साथ रहना चाहती है, तो वे उनकी शादी को स्वीकार करेंगे। "लेकिन उसने मुझसे कहा था कि नरेश ने मुंबई में कैब चालक के रूप में काम करने के बारे में झूठ बोला था। वह इस बड़े घर में बड़ी हुई और वहां एक झुग्गी में रह रही थी। नरेश शराबी भी था। एक महीने में ही उसने स्वाति जो पैसे लेकर गई थी उसे उड़ा दिया। जब उनके पास जीने के लिए पैसे नहीं बचे तो वे वापस आ गए।
नरेश के चाचा दशरथ का कहना है कि इसमें कोई संदेह नहीं कि क्या हुआ था। रेड्डी परिवार के लिए पिछड़े जाति के लड़के को दामाद के रूप में स्वीकार करना मुश्किल है। वे बहुत ताकतवर हैं।
नरेश के गायब होने के मामले की जांच कर रहे भोंगिर टाउन पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर एम शंकर कहते हैं, "नरेश की अंतिम लोकेशन हैदराबाद के पास एल बी नगर के नजदीक दर्ज की गई थी, जब उसने शोलापुर ले अपनी बहन नीलीमा को फोन किया था। उसने बताया था कि वह 10 मिनट में अपने चाचा के घर पहुंच जाएगा। उसके बाद उसका फोन बंद हो गया। "