रेप के बाद मर्डर को अपनी आदत बना चुका था चर्चित सीरियल किलर बीए उमेश रेड्डी उर्फ 'जैक द रिपर'। लेकिन, उसकी यह आदत उसे भारी पड़ गई है क्योंकि उसे सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। फांसी की सजा बरकार रहने के बाद उमेश के दिल में मौत का खौफ पैदा हो गया है और वह कानून की किताबे पढ़ कर अपनी सजा माफ करने की तैयारी कर रहा है।
पेशे से सीआरपीएफ का कांस्टेबल रह चुका उमेश एक सनकी शख्स है और उसे 37 साल की जयश्री मराडी के रेप और हत्या के आरोप में काफी साल पहले गिरफ्तार किया गया। लंबी सुनवाई के बाद 2006 में हाईकोर्ट ने उसके क्रूर और बर्बर अपराध के लिए मौत की सजा सुना दी। उसके खिलाफ 21 केस दर्ज हैं जिनमें से 9 में उसके खिलाफ आरोप तय हुए हैं, जबिक 11 में वह निर्दोष साबित हो गया।
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Umesh Reddy
- फोटो : Times of India
शिकार बन चुकी महिलाओं के अंडरगार्मेंट्स को रखता था बैग में
बेंगलुरु मिरर की खबर के अनुसार यह किलर अकेले रहने वाली महिलाओं का अपना निशाना बनाता था। टारगेट को चुनने के बाद उनके ऊपर सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच वार करता था। चौंका देने वाली बात है कि वारदात को अंजाम देने के बाद वह पीड़िताओं के अंडरगार्रमेंट्स को बैग में रख लेता था।
1998 में पुलिस ने उमेश को यशवंतपुर से गिरफ्तार किया था, जहां उसके पास से एक बैग बरामद हुआ, जिसमें महिलाओं के अंडरगार्मेंट्स थे। उसमें 10 ब्रा, 18 पैंटी, 6 सारी, व अन्य कपड़े बरामद किए गए।
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Umesh Reddy
- फोटो : murderpedia.org
पुलिस को चकमा दे भाग निकलता था जेल से
उमेश एक ऐसा शातिर क्रिमिनल है, जो कई बार पुलिस कस्टडी से फरार होने में कामयाब रहा है। 1996 में उसने सीआरपीएफ को बतौर कॉन्स्टेबल ज्वाइन किया। लेकिन लड़की के साथ रेप करने के आरोप में उससे नौकरी छीन ली गई और गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी से पहले उसने चित्तरादुर्गा की केइबी कॉलोनी में रूपा नाम की महिला का रेप कर हत्या कर दी थी।
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Umesh Reddy
जेल से पहली बार वह 1997 में फरार हुआ और महिलाओं को टारगेट बनाता गया। फरवरी 1998 में जयश्री के मर्डर के आरोप में गिरफ्तार हुआ उमेश फिर से भाग निकला, लेकिन मई 2002 में पुलिस ने शिकंजा कस उसे पकड़ लिया। कानून को अपने हाथ में लेने वाले उमेश को इस बात का डर नहीं था कि वह क्या कर रहा है, लेकिन फांसी की सजा ने उसे हिल्ला कर रख दिया है।
जेल में सजा काट रहे उमेश के बारे में पुलिस ने बताया कि वह जेल से भागने में एक शातिर क्रिमिनल माना जाता है। पुलिस ने बताया कि उमेश को कड़ी सुरक्षा में रखा गया है साथ ही उसे अपने सैल को छोड़ने की भी अनुमति नहीं है। वह रोज सुबह 5.45 बजे उठ जाता है और योगा करता है, साथ ही अखबार भी पढ़ता है।
लेकिन, यह सब उसे अपने सैल के अंदर ही करना होता है। इतना ही नहीं, उसे खाना भी कैद में ही दिया जाता है। उमेश ने अपने जेल को बदलने की कई बार अपील भी की, लेकिन उसकी यह मांग खारिज कर दी गई।