पुलिस के अनुसार कंपनी अनुशासन का पालन कराने के लिए कर्मचारियों को प्रताड़ित करती थी। कंपनी के मैनेजर रोजाना सामान बेचने का बड़ा लक्ष्य देते थे। लक्ष्य पूरा न होने पर डांट-फटकार के साथ पिटाई आम बात थी। कभी-कभी कर्मचारियों को खाना भी नहीं नसीब होता था। काम करने वाले युवकों और युवतियों को तनख्वाह का वादा कर केवल बिके सामान पर मामूली कमीशन दिया जाता था।
हत्यारोपी संजीत और अन्य कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि खुद संजीत की घर की हालत ठीक नहीं थी। उसके पिता विकलांग हैं। पत्नी बच्चों सहित घर की जिम्मेदारी उठाने के लिए वह विज्ञापन देखकर काम करने आया था, लेकिन उसे धोखा मिला। पुलिस ने बताया कि कर्मचारियों को आपस में बात करने की भी छूट नहीं मिलती थी। कंपनी सभी कर्मचारियों के आईडी और जरूरी कागजात अपने पास जमा कर लेती थी।