कभी एटीएम केबिन में कार्ड बदलकर रकम चुराने तो कभी ऑनलाइन हैकर्स द्वारा किसी को भी लालच देकर एकाउंट डिटेल पूछकर रकम निकालने की शिकायतें हर दिन बढ़ रही हैं।
इस तरह के हैकरों का जाल इस कदर फैला है कि पुलिस के पास हर सप्ताह औसतन आधा दर्जन से ज्यादा शिकायत पहुंच रही हैं, मगर नतीजा सिफर ही है। ऐसे ही एक मामले में एक आम आदमी ने 14 महीने की लड़ाई लड़ने के बाद जीत हासिल की है। यह शायद पहला मामला होगा जिसमें हैकर्स द्वारा उसके एकाउंट से दस हजार रुपये की रकम पार की गई, जिसे बैंक ने वापस लौटाया है और उसकी मदद न करने पर दो बैंक अफसरों को सजा बतौर सुदूर ट्रांसफर किया गया है।
मूल रूप से निरंजनपुर निवासी पेशे से अधिवक्ता नरेंद्र देव वशिष्ठ के साथ यह वाकया 19 दिसंबर 2015 की पूर्वाह्न 11 बजे घटित हुआ। उनका यूनाइटेड बैंक देंवेंद्रा मार्केट में खाता है। उन्हें अपने बेटे की स्कूल फीस जमा करनी थी। वह एफसीआई कार्यालय रामघाट रोड के नीचे स्थित ओबीसी बैंक शाखा के एटीएम में रुपये निकालने पहुंचे।
वहां प्रयास करने पर भी पांच हजार रुपये नहीं निकले, मगर तीन स्लिप जरूर आईं। इसके बाद वह दूसरे एटीएम केबिन में रुपये निकाल रहे थे, तभी उन पर ओबीसी के एटीएम से 10 हजार रुपये निकलने का मैसेज मोबाइल पर आया।
मामले की आरबीआई से की थी शिकायत
RBI
इसके बाद वह दौड़कर ओबीसी शाखा में मैनेजर से मिले और सीसीटीवी फुटेज दिखवाने की बात कही। मगर आज तक उन्हें न सीसीटीवी दिखाए गए और न उनकी बात को तवज्जो दी गई। इसके बाद उन्होंने ओबीसी प्रबंधन, आरबीआई और बैंकिंग लोकपाल तक शिकायतें शुरू कीं। बैंकिंग लोकपाल ने जब जांच शुरू की, तो ओबीसी के मैनेजर व सहायक मैनेजर को लापरवाह माना। इस पर इन दोनों का दूसरे राज्यों में तबादला कर दिया और ओबीसी की ओर से इस साल मार्च माह में नरेंद्र देव के एकाउंट में 10 हजार 365 रुपये वापस भेज दिए गए।
मामले के बारे में एसएसपी राजेश पांडेय ने बताया कि इस तरह के रैकेट पर हमारी सर्विलांस टीम काम कर रही है। यह निश्चित तौर पर संगठित गिरोह है, जिसकी धरपकड़ के लिए प्रयास जारी हैं। अमूमन हर सप्ताह दो-चार शिकायतें आती हैं। लोगों को भी इस तरह के रैकेट से सावधान रहने की जरूरत है। बैंकों में भी लोगों को जागरूक किया जाता है। फिर भी वह झांसे में आ जाते हैं। टीम जल्द ही सफलता हासिल करेगी।