मेवात सामूहिक दुष्कर्म मामले में जस्टिस दया चौधरी ने एक्टिंग चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर कई सवाल उठाए हैं। उनके पत्र में घटना के प्रति गुस्सा साफ तौर पर जाहिर हो रहा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि मेवात में लड़की को घर से उठा लिया गया और गैंगरेप के बाद छोड़ दिया गया। क्या महिलाएं सिर्फ प्लेजर के लिए हैं? उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को देखकर तो यही प्रतीत होता है। कि पुरुष अपना प्रभुत्व दिखाने के लिए महिलाओं के साथ रेप करते हैं। किसी भी महिला को जबरन उठा रहे हैं और ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
उनके इस पत्र को जनहित याचिका मानते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई तय करेंगे। जस्टिस चौधरी ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ सरकार को भी नोटिस भेजा। उन्होंने सवाल किया है कि यौन अपराध बढ़ाने के लिए क्या मोबाइल पर मिल रही पोर्न सामग्री जिम्मेदार नहीं है, जो आसानी से युवाओं को प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि सेक्स क्राइम बढ़ाने के लिए यह जिम्मेदार है।
उन्होंने फिल्म और टीवी सीरियल को भी जिम्मेदार बताया और कहा कि यह भी ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं। इन्हीं की सहायता से पुरुषों खासकर कि युवाओं और बच्चों को यौन हिंसा से संबंधित जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि क्या ऐसे हालातों में कड़े कानून बनाने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों की जांच के लिए नवीनतम तकनीकों का प्रयोग करना चाहिए। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मंगलवार को मामले पर संज्ञान लिया है।
गौरतलब है कि मेवात के एक गांव से 30 अप्रैल को 17 वर्षीय लड़की को उसी के घर से अगवा किया गया था। उसके बाद आठ लोगों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया और अगले दिन की सुबह आरोपियों ने उसे उसके घर के बाहर छोड़ दिया। इस घटना से सहमी नाबालिग ने इसके बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।