उत्तर प्रदेश में मेरठ के जिला सहकारी बैंक के असिस्टेंट मैनेजर प्रताप सिंह की आरोपियों ने दो जुलाई को ही अपहरण कर हत्या कर दी थी। पुलिस छह दिनों में मैनेजर का पता लगाने में विफल रही। आखिरकार बृहस्पतिवार को प्रताप का कंकाल ही बरामद हुआ।
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परिजनों ने शव को पहचानने से इंकार किया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी व पीड़ित परिवार का आमना-सामना कराया। आरोपियों ने मैनेजर के कपड़े, घड़ी और मोबाइल बरामद कराकर घटनाक्रम बताया। पांच घंटे बाद परिजनों को यकीन हुआ कि प्रताप की हत्या हो चुकी है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
मेडिकल क्षेत्र के कमालपुर गांव निवासी प्रताप सिंह कचहरी स्थित जिला सहकारी बैंक में असिस्टेंट मैनेजर थे। प्रताप ने कई लोगों को ब्याज पर पैसा दिया हुआ था। बीती दो जुलाई को प्रताप कांशीराम कॉलोनी निवासी राजकुमार की गढ़ रोड स्थित हैंडलूम फैक्ट्री में ब्याज का पैसा लेने गए थे।
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तभी से वह घर नहीं लौटे थे। परिजन पुलिस से बरामदगी की लगातार गुहार लगा रहे थे। जिस पर बुधवार को मेडिकल थाना पुलिस ने प्रताप सिंह की गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम किया था। पुलिस ने पूछताछ के लिए राजकुमार और उसके भाई संजय के अलावा फैक्ट्री कर्मचारी विकास निवासी गेसूपुर भावनपुर को हिरासत में लिया था।
शव के कपड़े उतारकर बोरी में भरकर फेंका था
पुलिस के अनुसार बुधवार देर रात तीनों आरोपियों ने प्रताप की हत्या करना कबूल किया। आरोपियों की निशानदेही पर बृहस्पतिवार दोपहर करीब एक बजे पुलिस ने प्रताप का शव अब्दुल्लापुर-गेसूपुर मार्ग स्थित नाले से बरामद कर लिया। जो कंकाल में तब्दील हो चुका था।
पुलिस ने प्रताप के परिजनों को बुलाकर जब शिनाख्त कराने के लिए कहा तो परिजनों ने पहचानने से इंकार कर दिया। मामला तूल पकड़ते देख पुलिस प्रताप के बेटे पवन समेत परिवार के सात लोगों को पुलिस लाइन स्थित क्राइम ब्रांच के ऑफिस में लेकर पहुंच गई।
पुलिस ने प्रताप के परिवार का तीनों आरोपियों से आमना-सामना कराया। इस दौरान पीड़ित के परिजनों ने हत्यारोपी राजकुमार को भी प्रताप की तरह ही मौत के घाट उतारने की धमकी दी।
वहीं आरोपियों ने बताया कि दो जुलाई को ही उन्होंने फैक्ट्री में प्रताप की शराब पिलाने के बाद हत्या कर दी थी। पुलिस के मुताबिक प्रताप के कपड़े, घड़ी और मोबाइल फोन आरोपियों की निशानदेही पर बरामद किया है। आरोपियों ने घटनाक्रम के बारे में पीड़ित परिवार को बताया। जिसके बाद पीड़ित परिवार ने शव की पहचान प्रताप के रूप में की।
कपड़े उतार बोरी में बंद किया था शव
नाले से प्रताप का शव बोरी में बंद मिला। शरीर पर केवल अंडरवियर ही था। पुलिस ने आरोपियों से इसका कारण पूछा तो आरोपियों ने बताया कि शव की पहचान छुपाने के लिए उन्होंने प्रताप के कपड़े उतार दिए थे। कपड़ों को अलग-अलग जगह पर फेंका था। जो बाद में पुलिस ने बरामद किए।
आरोपियों की निशानदेही पर बृहस्पतिवार सुबह ही पुलिस टीम गेसूपुर के नाले पर शव तलाशने पहुंच गई थी। जेसीबी मशीन भी चलवाई गई, लेकिन दोपहर तक शव नहीं मिला। तभी दो कुत्ते वहां आए और नाले में शव को नोंचने लगे। तभी पुलिस को अंदेशा हुआ कि यही पर शव है।
पुलिस शव को नाले से निकालने की हिम्मत नहीं जुटा रही थी। मेडिकल एसओ सफाई कर्मचारी को लेकर नाले में घुसे और शव को बाहर खींचकर लाए।
सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार ने बताया कि बैंक मैनेजर प्रताप की हत्या के पीछे 18 लाख रुपया है। प्रताप ने खुद के दस लाख, अपनी साली के पांच लाख व एक रिश्तेदार के तीन लाख रुपये राजकुमार को 10 फीसदी के हिसाब से ब्याज पर दे रखे थे। राजकुमार दो महीने से ब्याज भी नहीं दे रहा था। जिसके चलते उसने अपने भाई और कर्मचारी के साथ मिलकर प्रताप की हत्या का प्लान बनाया।
उधर, परिजनों ने पुलिस को बताया था कि दो जुलाई को आरोपी राजकुमार प्रताप को आनंद अस्पताल के पास से टेंपो से उतारकर अपने साथ फैक्ट्री में ब्याज के पैसे दिलाने की बात कहकर ले गया था। जिसके चलते ही अपहरण की तहरीर दी गई थी।