हाईकोर्ट ने पत्नी से जबरन दुष्कर्म को अपराध मानते हुए गंभीर टिप्पणी की है। वैवाहिक दुष्कर्म के मुद्दे पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि शादी का मतलब यह नहीं है कि पति को हिंसा का अधिकार मिल जाता है। अदालत ने यौन हिंसा को मानवाधिकार का उल्लंघन बताया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायाधीश सी. हरिशंकर की पीठ ने सुनवाई करते हुए फिलीपींस के कानून का हवाला देते हुए कहा कि शादी किसी महिला पर उसके पति के हाथों हिंसा करने का अधिकार नहीं हो सकती।
एक एनजीओ फोरम टू एंगेज मेन (फेम) ने इस मामले में पक्षकार बनने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 4 सितंबर को होगी।
एनजीओ के सदस्य डॉ. अभिजीत की याचिका में कहा गया है कि शादी महिला व पुरुष के बीच सहमति व सम्मानपूर्ण रिश्ता है। इसमें जबरन यौन संबंधों की कोई गुंजाइश नहीं है।