मामले में वरिष्ठ इंस्पेक्टर अशोक घोरबंद ने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों के लोग अपनी निजी समस्याओं के निदान के लिए नूरी की मदद मांगते थे। लेकिन स्वयंभू बाबा उनकी मदद करने की जगह उन पर एक-दूसरे से संबंध बनाने का दबाव डालता था। हालांकि पीड़ितों को धारा 377 की जगह धारा 295 (किसी भी धर्म या वर्ग के पूजा स्थल को जानबूझकर अशुद्ध करना) के तहत गिरफ्तार किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक नूरी शादीशुदा युवा पुरुषों को अपना शिकार बनाता था। वह पूजा-पाठ के बहाने उन्हें एक कमरे में ले जाता था और वहां पर उन पर एक-दूसरे के साथ अप्राकृतिक संबंध के दबाव डालता था।