मुंबई में बम ब्लास्ट होने से तीन दिन पहले 9 मार्च, 1993 को मुंबई पुलिस ने गुल मोहम्मद उर्फ गुल्लू नाम के एक अपराधी को पकड़ा था। 1992 में दिसंबर और 1993 में जनवरी में मुंबई में हुए दंगों के सिलसिले में पकड़े गए गुल्लू ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल करते हुए यह खुलासा किया था।
पढ़ें: मुंबई ब्लास्ट के बाद आजमगढ़ भाग आया था अबू सलेम, तैयार किए कई 'शूटर'
उसने बताया कि महानगर में स्टॉक एक्चेंज, एयरपोर्ट और सेना भवन पर बम धमाकों की साजिश रची गई है, लेकिन मुंबई पुलिस ने इस छुटभैये अपराधी की बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। काश उसकी सूचना को सही मानकर पुलिस ने कार्रवाई की होती तो सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
अप्रैल की जगह मार्च में करने पड़े धमाके
Mumbai bomb blast
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और चांदी के स्मगलर टाइगर मेमन ने बाबरी विध्वंस और उसके बाद हुए दंगों का बदला लेने के लिए मुंबई में सीरियल बम धमाकों की साजिश रची थी।
1993 के अप्रैल में शिवरात्रि के दिन धमाके किए जाने थे लेकिन गुल्लू की गिरफ्तारी से साजिशकर्ता सतर्क हो गए और 12 मार्च को ही अपनी खूंरेजी योजना को अंजाम दे दिया।
मानी थी पाकिस्तान में ट्रेनिंग की बात
Mumbai bomb blast
गुल्लू ने बताया था कि टाइगर मेमन ने उसे 19 फरवरी, 1993 को दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजा था, जहां उसे हथियार एवं विस्फोटकों की ट्रेनिंग दी गई। वह 4 मार्च को लौट कर आया तो पता चला कि पुलिस ने उसके भाई को गिरफ्तार कर रखा है। उसे छुड़ाने के लिए गुल्लू ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए।
महत्वपूर्ण जगहों को बनाया था निशाना
Abu Salem
बांबे स्टॉक एक्सचेंज, माहिम मच्छीमार कालोनी, शिव सेना भवन दादर, झवेरी बाजार, प्लाजा सिनेमा, सेंचुरी बाजार, कत्था बाजार, होटल सी रॉक, सहार एयरपोर्ट, एयर इंडिया भवन नरीमन प्वाइंट, होटल जुहू सेंटोर, वर्ली, पासपोर्ट ऑफिस, मस्जिद मांडवी
पढे़ं: मां के जनाजे में शामिल होकर आजमगढ़ से राजनीति करना चाहता था अबू सलेम