अगले दिन सुबह पीड़िता की बेटी ने अपने नाना को फोन पर पूरी घटना के बारे में जानकारी दी। वो अपने बेटे को लेकर बेटी के ससुराल पहुंचे। पीड़िता के पिता ने कहा, "हमने जब समधी जी और दामाद से इस घटना के बारे में पूछा तो दोनों ने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ मालूम नहीं है। इसके बाद मैंने गांव के मुखिया से बात की।" वो आगे कहते हैं, "उन्होंने गांव के अन्य बुजुर्गों से बातचीत की और उसके बाद हमसे दो दिन का समय मांगा।
मजबूरन हम बेटी और उसके दोनों बच्चों को लेकर अपने गांव वापस आ गए।" "मई की 27 तारीख को स्थानीय थाने में हमने रिपोर्ट दर्ज करानी चाही, तो पुलिस ने मामला दर्ज करने के बजाय हमें बेटी के पति के साथ सुलह करने की सलाह दी। बुधवार को हम एसपी साहब से मिले तब जाकर मामला दर्ज हुआ है।"
हालांकि थाना प्रभारी ने पीड़िता के पिता के इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा, "मैं खुद छुट्टी पर था। वापस आने के बाद पता चला कि दोनों पक्ष ने एक समझौता याचिका दायर किया है। लेकिन बाद में जब एसपी साहब ने आदेश दिया हमने तत्काल एफआईआर दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।"
पीड़िता के पिता का आरोप है कि मामला दर्ज होने के बाद भी पुलिस उन्हें परेशान कर रही है। वो कहते हैं, "आज भी हमें थाने में तीन से चार घंटे बैठाया गया और मेरी बेटी से गलत सवाल पूछे गए, मानो दोषी उसका पति नहीं वो खुद हो।" पीड़िता के पिता यह कहते हुए रो देते हैं और न्याय की उम्मीद जताते हैं।