रेप के दोषी डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह रोहतक जेल में 20 साल की सज़ा काट रहे हैं। गुरमीत के साथ हमेशा नज़र आने वाली हनीप्रीत 25 अगस्त के बाद से फ़रार है। हनीप्रीत के अब नेपाल में होने के कयास लगाए जा रहे हैं। पुलिस हनीप्रीत की तलाश में है। 24 अगस्त की शाम से सिरसा में क़र्फ्यू के बावजूद हनीप्रीत कैसे भाग निकली? इस सवाल का जवाब न तो ज़िला प्रशासन के पास है न सरकार के पास।
एसआईटी ने हनीप्रीत का पता लगाने के लिए डेरे की प्रशासक विपश्यना इंसां से पूछताछ की। विपश्यना ने पूछताछ में ये माना कि हनीप्रीत सिरसा डेरे में 25-26 की रात को थीं। ये वो वक्त था, जब गुरमीत के डेरे सील थे। ऐसे में हनीप्रीत का डेरे में आना और फिर जाना, प्रशासन की चूक ज़ाहिर करता है। 24 अगस्त की शाम से प्रशासन ने 16 नाके लगाए। इस नाकेबंदी के तहत अर्धसैनिक बल, हरियाणा पुलिस के जवान और ड्यूटी मैजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे।
सब सील था कैसे निकली हनीप्रीत ?
Honeypreet Insan
- फोटो : File Photo
प्रशासन की ओर से चेतावनी भी दी गई थी कि कोई भी व्यक्ति अपने घर से बाहर नहीं निकलेगा। सिरसा और डेरा की सुरक्षा के मद्देनजर सेना और अर्धसैनिक बलों की 40 कंपनियां सिरसा पहुंचकर तैनाती ले ली थी।
गुरमीत की गिरफ़्तारी के बाद सिरसा में भड़की हिंसात्मक घटनाओं में छह लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद सिरसा शहर से बड़े डेरे की ओर जाने वाले सभी रास्तों को सीलबंद कर दिया गया। सावधानी बरतते हुए इस दौरान अर्धसैनिक बलों के जवान आने-जाने वालों का नाम लिखकर वाहनों की तलाशी ली थी।
सरकार के रवैये के चलते भागी हनीप्रीत ?
Honeypreet Insan
सिरसा एसआईटी के प्रभारी और डीएसपी कुलदीप बेनीवाल ने जांच में पाया कि 26 अगस्त की रात तक हनीप्रीत डेरे में थी। बेनीवाल ने कहा, ''26 की रात के बाद से हनीप्रीत की कोई ख़बर नहीं है.'' हनीप्रीत की गिरफ़्तारी को लेकर पंचकुला पुलिस की टीमें लगातार सिरसा पुलिस से संपर्क में हैं और जानकारी साझा की जा रही है। हालांकि जांचकर्ताओं ने मीडिया को ज़्यादा जानकारी देने से इंकार किया।
डेरा के पूर्व सेवादार गुरदास सिंह तूर कहते हैं, ''इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराई जानी चाहिए। क़र्फ्यू के दौरान डेरा से निकलने वाले लोगों को किस आधार पर निकलने दिया गया ?''
तूर ने आरोप लगाया कि सरकार और स्थानीय प्रशासन के ढुलमुल रवैये के चलते ही डेरा के भीतर मौजूद संदिग्ध सामान को ठिकाने लगा दिया गया, इस गंभीर मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
रामचंद्र छत्रपति के बेटे ने क्या कहा ?
Anshul Chhatrapati
गुरमीत केस में सबसे पहले चिट्ठी छापने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कहा कि अब तक की सरकारें डेरा को संरक्षित करती आई हैं। उन्होंने कहा कि डेरा प्रमुख के ख़िलाफ़ न तो पहले की सरकारों ने क़दम उठाया और न ही पुलिस प्रशासन ने।
डेरा प्रमुख के ख़िलाफ़ अब तक दर्ज हुए मामले सीधे तौर पर सीबीआई ने अपने स्तर पर दर्ज किए हैं। अंशुल छत्रपति ने भी इस पूरे मामले की गहराई से जांच की मांग की है ताकि वास्तविकता उजागर हो सके।