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'मुझसे मोहब्बत करने के कारण मेरे पति को मार डाला', 6 को हुई फांसी की सजा

Tue, 23 Jan 2018 12:34 PM IST
बीबीसी हिंदी
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मार्च 2016 में 22 साल के लड़के की दर्दनाक हत्या ने पूरे तमिलनाडु को सकते में डाल दिया था। शंकर नाम के एक शख्स को ऊंची जाति की एक लड़की कौशल्या से शादी करने के कारण दिनदहाड़े मौत के घाट उतार दिया गया था। इस खौफनाक मामले में कौशल्या ने गवाही देकर खुद अपने परिवार को सजा दिलाई। दिसंबर में कौशल्या के पिता सहित छह लोगों को 'हॉरर किलिंग' के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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अब कौशल्या चाहती हैं कि उनकी मां को भी सजा दी जाए। जातिगत बर्बरता के खिलाफ अभियान चला रही 20 साल की कौशल्या से बीबीसी संवाददाता सौतिक बिस्वास ने मुलाकात की। जिस दिन शंकर की हत्या हुई कौशल्या उस दिन अपने गांव में थी और सुबह नौ बजे उठ गई थीं। तब तक दोनों की शादी को आठ महीने हुए थे।

वह रविवार का दिन था और दोनों करीब 14 किलोमीटर दूर बस में बैठकर उडुमालपेट के एक स्थानीय बाजार में गए। वे शंकर के लिए नए कपड़े लेने जा रहे थे क्योंकि अगले दिन उन्हें कॉलेज के एक समारोह में जाना था।
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सड़क पर हुआ हमला

कौशल्या ने बताया कि जब वह बाजार में एक दुकान पर पहुंचे तो धूप तेज थी। उन्हें शंकर के लिए एक गुलाबी रंग की कमीज पसंद आई और सोचा कि उनके पति इसमें बहुत अच्छे लगेंगे। जब वो लोग दुकान से जाने लगे तो शंकर को एक पुतले के पहनाई हुई हरे रंग की कमीज पसंद आ गई।

शंकर ने कहा, ''मुझे यह कमीज ज्यादा पसंद है।'' वो दोबारा दुकान में गए और गुलाबी की जगह हरी कमीज खरीद ली। इसके बाद दोनों घर जाने के लिए बस लेने दुकान से बाहर निकलकर भीड़ भरी सड़क पार करने लगे। लेकिन, घर लौटने से पहले शंकर, कौशल्या को उनका पसंदीदा चिली स्नैक खिलाना चाहते थे। लेकिन, उनके पास सिर्फ 60 रुपये बचे थे और इससे वो स्नैक नहीं खरीद सकते थे। तब शंकर ने घर पर कौशल्या के लिए अच्छा सा खाना बनाने का वादा किया।

बाजार में लगे सीसीटीवी में साफ देखा जा सकता है कि कौशल्या और शंकर सड़क की तरफ चलने लगे। लेकिन, वे सड़क पार कर ही पाते कि दो बाइक पर सवार पांच लोग उनके पीछे आकर रुके। तब चार लोगों ने कौशल्या और शंकर पर चाकू से हमला बोल दिया। दोनों पर इस तरह वार किये जैसे वो ​झाड़ियों को काट रहे हों। लहूलुहान शंकर अपनी जान बचाने के लिए भागा। कौशल्या भी लंगड़ाती हुईं एक एसयूवी की तरफ बढ़ी, लेकिन हमलावरों ने उन्हें धक्का देकर गिरा दिया।

ये सबकुछ 36 सैकंड के अंदर हो गया। इसके बाद हत्यारे बाइक पर सवार होकर फरार हो गए। (पुलिस ने बाद में जांच में पाया कि तीन बाइक पर छह लोग आए थे, जिनमें दो बाइक्स की नंबर प्लेट फर्जी थी। पाँच ने कौशल्या और शंकर पर हमला किया, जबकि एक व्यक्ति निगरानी करता रहा)

चाकू से किए गए 34 वार

​इसके बाद एंबुलेंस में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल 60 किलोमीटर दूर था और हैरानी की बात थी कि अटेंडेंट आगे की सीट पर बैठ गया। कौशल्या स्ट्रैचर पर बैठी थीं और उन्हें धुंधला दिखाई दे रहा था। कौशल्या के हाथ में आईवी ड्रिप थी और शंकर लेटे थे। शंकर ने कराहते हुए कहा, "अपना सिर मेरे सीने पर रख दो।" कौशल्या शंकर की तरफ बढ़ गई।

एंबुलेंस के अस्पताल पहुंचने के कुछ मिनट बाद ही शंकर की सांसें थम गईं। डॉक्टर ने बताया कि शंकर के शरीर पर काटने के 34 निशान और चाकू के घाव पाए गए थे। उनकी मौत कई जगह कटने और चोटों के कारण हुए शॉक और हेमरेज से हुई थी। कौशल्या 20 दिनों तक अस्पताल में रहीं और उनका चेहरा पट्टियों से बंधा रहा। उन्हें 36 टांके लगे थे और कई जगह हड्डियां टूटी थीं। उन्होंने अस्पताल में ही पुलिस को बताया कि उनके माता-पिता इस हमले के लिए जिम्मेदार हैं। कौशल्या ने बताया, ''चाकू से मारते हुए एक हमलावर लगातार चिल्ला रहा था कि तुमने उसे प्यार क्यों किया? क्यों?''

शंकर और कौशल्या का परिवार

शंकर एक दलित परिवार से थे और उनके पिता कुमारलिंगम एक खेती मजदूर थे। चार सदस्यों का यह परिवार एक कमरे की झोपड़ी में रहता था। वहीं, कौशल्या अपेक्षाकृत पिछड़ी समझी जानेवाली थेवर जाति से हैं। उनके 38 साल के पिता टैक्सी ऑपरेटर हैं और पैसे उधार पर देते हैं। उनका परिवार एक छोटे से शहर पलानि में दो मंजिला घर में रहता है।

जब कौशल्या ने अपने माता-पिता को बताया कि वह एयर होस्टेस बनना चाहती हैं तो उन्हें मना कर दिया गया। घरवालों को आपत्ति थी कि इस पेशे में उन्हें छोटी स्कर्ट पहननी पड़ेगी। साल 2014 में कौशल्या का स्कूल पूरा होने के बाद घरवाले उनकी शादी करवाना चाहते थे और उन्हें एक लड़के से मिलाया भी गया था। लेकिन, कौशल्या के शादी से इनकार करने पर उन्हें कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए निजी कॉलेज भेज दिया गया।

कौशल्या कहती हैं कि वह कॉलेज से नफरत करती थीं क्योंकि ''वहां पर कई सारी पाबंदियां लगी हुई थीं। हम कैंपस से बाहर नहीं निकल सकते थे। लड़कों से बात नहीं कर सकते थे। क्लास में लड़के और लड़कियां अलग-अलग बैठते थे। अगर किसी को लड़कों से बात करते देख लिया जाता तो उसके घरवालों को खबर दे दी जाती। वहां दम घुटता था।''

कॉलेज में शुरू हुई कहानी

लेकिन, प्यार की शुरुआत इन हालातों में भी हो सकती है। कौशल्या और शंकर की कहानी कॉलेज में शुरू हुई। कॉलेज के फ्रेशर फंक्शन में शंकर ने कौशल्या के पास आकर बात की और पूछा कि, ''क्या आप किसी और को प्यार करती हैं?'' तब कौशल्या चुपचाप वहां से चली गईं। उन्हें इस सवाल पर शर्म आई।

इसके बाद शंकर ने आगे भी कौशल्या से बात करने की कोशिश की और फिर दोनों में दोस्ती की शुरुआत हो गई जो बाद में प्यार में बदल गई। कौशल्या कहती हैं कि यह प्यार उन्हें बहुत मुश्किल से मिला था। तब वह शंकर से बात करने के लिए अकेली घर से नहीं निकल सकती थीं। इसलिए दोनों मैसेज में बात करते थे। 18 महीने तक ये बातचीत चलती रही और दोनों ने एक-दूसरे को अपनी उम्मीदों व सपनों के बारे में बताया।

कॉलेज के दूसरे साल में कौशल्या ने जापानी भाषा सीखने के लिए एक क्लास ज्वाइन की और इसके बहाने वो कॉलेज से बाहर निकलकर शंकर से मिलने लगीं। शंकर उनका इंतजार करते और फिर दोनों साथ में बस लेते और बातें करते।
 

जब घरवालों को पता चला

लेकिन, जुलाई 2015 में एक दिन बस कंडक्टर ने उन्हें बात करते हुए देख लिया और कौशल्या का घर पता करके उनकी मां को इसकी सूचना दे दी। उसी शाम कौशल्या के माता-पिता ने उनका फोन ले लिया और शंकर को फोन करके कौशल्या से दूर रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा ''शंकर उन्हें गर्भवती कर देगा और भाग जाएगा।'' अगले दिन उनका कॉलेज भी छुड़वा दिया गया।

रातभर कौशल्या बहुत रोईं। जब वह सुबह उठीं तो उनके घर में कोई नहीं था। उनके माता-पिता कहीं गए हुए थे। तब कौशल्या ने अपना फोन ढूंढा और शंकर को फोन करके घर में हुई लड़ाई के बारे में बताया। कौशल्या ने शंकर से पूछा कि क्या वह उन्हें गर्भवती करके भाग जाएगा। इस पर शंकर ने कहा, ''अगर तुम्हें ऐसा लगता है, हम अभी भाग सकते हैं और शादी कर सकते हैं।'' तब कौशल्या ने अपना बैग पैक किया और घर छोड़कर स्थानीय बस स्टॉप पर गईं। अगले दिन, 12 जुलाई 2015 को दोनों एक मंदिर गए और शादी कर ली।

इसके बाद दोनों स्थानीय पुलिस स्टेशन गए और अपने अंतरजातीय विवाह के बारे में बताया और सुरक्षा की मांग की। तमिलनाडु में दलित और जनजा​तीय लोग जातिगत बर्बरता का शिकार रहे हैं। उस साल में उनके खिलाफ किए गए 1700 से अधिक अपराध दर्ज किए गए थे।


जिंदगी का खूबसूरत वक्त

कौशल्या ने बताया कि उनकी जिंदगी के अगले आठ महीने सबसे ज्यादा आजादी और खुशी से भरे थे। वह शंकर के घर में गईं और वहीं रहने लगीं। कौशल्या का कॉलेज छूट चुका था और वह एक सेल्सगर्ल की नौकरी करने लगीं। उन्हें 5000 रुपये तनख्वाह मिलती थी।

कौशल्या के माता-पिता और रिश्तेदारों ने उन्हें अलग करने की पूरी कोशिश की: उन्होंने शंकर के खिलाफ कौशल्या के अपहरण की शिकायत की। फिर शादी के दो हफ्ते बाद उन्हें जबरदस्ती पकड़कर पंडितों के पास ले गए, जहां उनके चेहरे पर भभूत लगाई गई। उन पर अपने पति को छोड़ने का दबाव डाला गया। उनके घरवालों ने शंकर को कौशल्या को छोड़ने के लिए दस लाख रुपये देने की पेशकश भी की। कौशल्या ने बताया कि शंकर की हत्या से एक हफ्ते पहले उनके माता-पिता उनकी ससुराल आए और उन्हें वापस लौटने के लिए कहने लगे। लेकिन, कौशल्या ने इससे मना कर दिया।

'हम जिम्मेदार नहीं'

ससुराल से जाने से पहले कौशल्या ने पिता ने कहा था, ''आज के बाद अगर तुम्हारे साथ कुछ होता है तो उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।'' पुलिस को पता चला कि कौशल्या के पिता ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले पांच लोगों को अपनी बेटी और दामाद की हत्या करने के लिए 50 हजार रुपये दिए थे। उन्होंने ये हत्या दिनदहाड़े करने के लिए कहा ताकि ''सार्वजनिक तौर पर यह संदेश जाए'' कि एक महिला के नीची जाति के पुरुष के साथ प्यार करने पर क्या होता है।

इस हत्या के 120 गवाह थे। कौशल्या ने अदालत में 58 बार अपने माता-पिता की जमानत का विरोध किया। कौशल्या ने न्यायाधीश को बताया, ''मेरी मां बार-बार मुझे मारने की धमकी दे रही थी। उन्होंने कहा था कि शादी से अच्छा मेरा मर जाना होता।''

दिसंबर में, न्यायाधीश अलामेलु नटराजन ने कौशल्या के पिता सहित छह लोगों को मौत की सजा सुनाई। उनकी मां सहित दो लोगों को छोड़ दिया गया। कौशल्या अपनी मां के बरी होने के खिलाफ अपील करने वाली हैं क्योंकि उनका मानना है कि उनकी मां भी इसमें बराबर की जिम्मेदार हैं।
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अब एक अभियान का हिस्सा

कौशल्या बताती हैं कि शंकर की मौत के बाद वह कई बार बुरी तरह से टूटीं और आत्महत्या करने का भी ख्याल आया। लेकिन, फिर उन्होंने अपने बाल कटवाए और कराटे सीखने और जाति पर किताबें पढ़नी शुरू कीं। वह जाति विरोधी समूहों से मिलीं और जाति संबंधी अपराधों के लिए खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने दलितों द्वारा पारंपरिक रूप से बजाए जाने वाला ड्रम, पराई भी बजाना सीखा।

आज, कौशल्या ने सरकार से मिले मुआवजे से शंकर के सपने को पूरा करते हुए अपने परिवार के लिए चार कमरों का घर बनाया। उन्होंने गांव में गरीब बच्चों के लिए ट्यूशन सेंटर भी शुरू किया है। परिवार चलाने के लिए वह एक सरकारी कार्यालय में क्लर्क की नौकरी कर रही हैं। हफ्ते के अंत में वह तमिलनाडु में घूमती हैं और जाति, ऑनर किलिंग के खिलाफ और ''प्यार के महत्व'' पर बात करती हैं।

वह कहती हैं, ''प्यार पानी की तरह है, यह प्राकृतिक है। प्यार हो जाता है। और जाति व्यवस्था को खत्म करने के लिए महिलाओं को इसके खिलाफ आवाज उठानी पड़ेगी।'' कई लोग उनके अभियान को पसंद नहीं करते हैं और उनके फेसबुक वॉल पर जान से मारने की धमकी देते हैं। इसलिए उन्हें पुलिस सुरक्षा भी दी गई है। शंकर की मौत के बाद, डॉक्टर ने उनका फोन कौशल्या को दे दिया। उस फोन में उनके रिश्ते की कई प्यारी यादें हैं। साल 2015 में गर्मियों की एक शाम ने शंकर ने कौशल्या को मैसेज किया था, ''मुझे नहीं पता कि क्या कहूं लेकिन मुझे तुम्हारी याद आ रही है।'' कौशल्या ने जवाब दिया था, ''मुझे भी।''
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