स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त पीएस कुश्वाह ने बताया कि पिछले करीब 10 सालों से कई राज्यों की पुलिस अब्दुल सुभान उर्फ तौकीर की तलाश कर रही थी।
अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद वह फरार हो गया था। जांच के दौरान 20 जनवरी 2018 को स्पेशल सेल को सूचना मिली कि अब्दुल सुभान दिल्ली-यूपी की सीमा के पास गाजीपुर पेपर मार्केट में सफेद रंग की कार से अपने किसी पुराने साथी से मिलने आने वाला है।
सूचना के बाद एसीपी गोविंद शर्मा व इंस्पेक्टर चंद्रिका प्रसाद व अन्यों की टीम ने शनिवार रात वहां जाल बिछा दिया। करीब 8.15 बजे अब्दुल सुभान वहां पहुंचा।
पुलिस को देखते ही उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से एक 9 एमएम की पिस्टल बरामद हुई है।
पुलिस के मुताबिक दोनों ओर से करीब 13-14 गोलियां चली, लेकिन गनीमत रही कि कोई घायल नहीं हुआ। पूछताछ के दौरान आतंकी सुभान ने बताया कि 2001-02 में सिमी पर प्रतिबंध लगने के बाद उसने सूरत से अपना बेस बीजापुर गुजरात में शिफ्ट कर दिया।
सिमी के संस्थापक सफदर नागोरी ने उसे कर्नाटक का हेड अंसार (सिमी का बड़ा पद) बना दिया। बाद में उसने रियाज और इकबाल भटकल के साथ मिलकर इंडियन मुजाहिद्दीन को खड़ा कर दिया।
इस बीच 11 जुलाई 2006 में मुंबई की ट्रेनों में सीरियल ब्लास्ट हो गए। उसमेें अब्दुल सुभान का नाम सामने आया। इधर सफदर नागोरी की गिरफ्तारी के बाद सुभान सिमी का मुखिया बन गया। उसने 2008 में अहमदाबाद और सूरत में धमाके करने की साजिश रची।
अहमदाबाद में जुलाई 2008 में वह 23 ब्लास्ट करने में कामयाब रहा, लेकिन सूरत में 27 जुलाई से 3 अगस्त के बीच 29 आईईडी फटने से पहले पुलिस ने बरामद कर लिए।
गुजरात पुलिस से बचने के लिए आरोपी बिहार के रास्ते नेपाल भाग गया। वहां उसने वहां की नकली आईडी बनाकर अंग्रेजी टीचर की नौकरी शुरू कर दी।
2015 में वह नेपाल के नकली पासपोर्ट के जरिये आईएम के लिए फंड जुटाने सऊदी अरब चला गया। वहां 2017 तक रहने के बाद भारत आ गया।
यहां अलग-अलग जगहों पर रुककर वह आईएम को खड़ा करने का प्रयास कर रहा था, लेकिन उससे पूर्व पुलिस ने उसे दबोच लिया। सुभान की एनआईए के अलावा बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हैदराबाद और यूपी पुलिस को तलाश थी।