भोपाल में पुलिस ने एक ऐसे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है यहां से अमेरिकी नागरिकों को फोन करते थे और उनसे 70 करोड़ की ठगी की वारदात को अंजाम दिया। फर्जीवाड़ा करने वाले इस गिरोह का मास्टरमाइंड है अहमदाबाद के बड़े कपड़ा कारोबारी का बेटा जो 12वीं पास है। वह अपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे अपने दोस्तों के साथ मिलकर अमेरिकी नागरिकों को फोन करता था। इस गिरोह ने करीब पांच हजार अमेरिकियों को फोन किया और उन्हें लोन सेटलमेंट के नाम पर गिरफ्तारी का खौफ दिखाता था।
इसके बाद अमेरिका में रहनेवाला उनका एक साथी उन अमेरिकी नागरिकों से करीब तीन हजार डॉलर तक की रकम ऐंठ लेता था। यह रकम वह वर्जुअल करंसी बिटकॉइन, मनीग्राम और हवाला के जरिये हासिल करते थे। और यह सारा फर्जीवाड़ा पिछले एक साल से चल रहा था भोपाल के इंद्रपुरी के एक फ्लैट से। पुलिस की साइबर सेल ने यहां छापा मारकर फर्जी कॉल सेंटर चलाने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया है।
अहमदाबाद के 22 वर्षीय अभिषेक पाठक अपने साथी सेमरा, अशोका गार्डन निवासी 29 वर्षीय रामपाल सिंह पिता काशी सिंह के साथ मिलकर चला रहा था। उसने कॉल सेंटर में 10वीं क्लास में पढ़नेवाले लड़कों से लेकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्रों को नौकरी पर रखा था। पकड़े गए आरोपियों की पहचान शुभम गीते, मोहम्मद फरहान खान, सौरभ राजपूत और मौर्य श्रवणकुमार के तौर पर हुई है और इन सभी की उम्र 19 साल है।
पुलिस ने अभिषेक की निशानदेही पर अहमदाबाद से 25 वर्षीय वत्सल दीपेशभाई गांधी को गिरफ्तार किया। वत्सल ने ही अभिषेक को अमेरिकी नागरिकों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई। डीजी सायबर सेल अरुणा मोहन राव और एडीजी राजेश गुप्ता ने बताया कि इस तरह के गिरोह इससे पहले दिल्ली और अहमदाबाद में भी पकड़े जा चुके हैं।
12 लाख अमेरिकी थे गिरोह के निशाने पर
अभिषेक ने पुलिस को बताया कि वह रामपाल के साथ अहमदाबाद के एक कॉल सेंटर में काम करता था। उन्हें वत्सल से अमेरिका के 12 लाख लोगों का डाटा मिला। इन सभी ने कोई न कोई लोन ले रखा था। मैंने रामपाल के साथ मिलकर इंद्रपुरी में 12 हजार रुपए महीने पर एक फ्लैट किराए पर लिया।
इस फ्लैट में कॉल सेंटर बनाने में 7 से 8 लाख रुपए का खर्च किया। शुभम, फरहान, सौरभ और मौर्य को हर महीने 10 हजार से 15 हजार रुपए की सैलरी पर नौकरी पर रखा था। अक्टूबर 2017 से चालू इस कॉल सेंटर से वह 3 लाख अमेरिकियों को मैसेज कर चुके थे, जबकि अब तक पांच हजार अमेरिकियों को गिरफ्तारी का डर दिखाकर रकम ऐंठ चुके थे।
अमेरिकन लहजे में बात करने की अहमदाबाद में ली ट्रेनिंग
गिरोह की खासियत यह थी कि अभिषेक और रामपाल ही अमेरिकन एजेंट से बात कर पाते थे। फरहान, मौर्य, शुभम और सौरभ अमेरीकी लोगों को मैसेज भेजते थे, जिसमें फर्जी वारंट होता था। उसके बाद कॉल आने पर अभिषेक और रामपाल ही बात करते थे। इसके लिए उन्होंने अहमदाबाद से अमेरिकन लहजे में ट्रेनिंग ली थी।
रात में चलता था कॉल सेंटर
कॉल सेंटर रात 8 बजे से सुबह 5 बजे तक चलता था, क्योंकि इस दौरान अमेरिका में दिन होता है। आसपास के लोगों से अभिषेक ने कह रखा था कि वह कंप्यूटर सेंटर चलाता है। कामकाजी लोग रात को यहां पर आकर कंप्यूटर सीखते हैं।
भोपाल से इंटरनेट और वाट्सएप से धमकाकर वसूलते थे डॉलर
अमेरिका में बैठा उनका साथी माइकल डेनियल गिरोह का सरगना था। भोपाल से अमेरिकियों को इंटरनेट और वाट्सएप से कॉल किया जाता था। अमेरिकियों से लोन सेटलमेंट के नाम पर डेनियल से बात करने को कहा जाता था।
डेनियल सेटलमेंट कर लेता और फिर वह मनीग्राम, बिटकॉइन और हवाला के जरिए पीड़ितों से पैसा अपने खाते तक पहुंचवा लेता। इसके बाद 10 फीसदी कमीशन अभिषेक और रामपाल के खाते में भिजवा देता।