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राम रहीम के डेरे का एक खौफनाक सच सामने आते ही उड़ी पुलिस की नींद

Thu, 31 Aug 2017 01:09 PM IST
amarujala.com, Presented by: देव कश्यप
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रेप केस में 20 साल की सजा पा चुके गुरमीत राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा का एक खौफनाक सच सामने आते ही पुलिस की रातों की नींद उड़ गई है। 
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इसका कारण है, डेरे की ओर से तैयार 'सुसाइड स्कवॉयड'। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, यह 20 अक्टूबर, 2005 को सिरसा के एक निवासी इंदू द्वारा हस्ताक्षर कर दिया गया एक हलफनामा है।

हल्फनामे में लिखा है कि, 'मैंने अपना जीवन मानवता के कारण समर्पित किया है जिसे डेरा सच्चा सौदा ने बढ़ावा दिया है। अगर मैं किसी दुर्घटना में या किसी अन्य तरीके से मर जाता हूं, तो इसके लिए मैं जिम्मेदार रहूंगी। मेरी मृत्यु के लिए किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। डेरा सच्चा सौदा भी मेरी मृत्यु के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। मेरे किसी भी वंश या परिवार के सदस्यों को मेरी मृत्यु के लिए जिम्मेदार डेरा सच्चा सौदा को पकड़ने का अधिकार नहीं होगा।'
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सीबीआई द्वारा डेरा में कथित आपराधिक गतिविधियों की जांच शुरू करने के बाद ऐसे कई दस्तावेज तैयार किए गए हैं, उनमें से यह एक है।
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यह हलफनामा एक पंजीकृत स्टांप पेपर पर तैयार की गई है। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 25 अगस्त को सीबीआई अदालत ने दो-दो साध्वियों के साथ बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराया था। जिसके बाद ऐसे कई दस्तावेज सार्वजनिक क्षेत्र में आने शुरू हो गए हैं। 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, ये दस्तावेज दिखाते हैं कि डेरा अनुयायियों की ओर से तथाकथित 'आत्मघाती दस्ते' की तैयारी की जा रही थी। पुलिस के मुताबिक, अनुयायी किसी भी हद तक जा सकता है ताकि डेरा प्रमुख के खिलाफ मामले में जांच कर रहे एजेंसियों पर दबाव बढ़ सके।

आईजी, इंटेलिजेंस, ए के राव कहते हैं, हमारे पास एक बार फिर से सक्रिय होने वाले इस दस्ते के बारे में खुफिया जानकारी थी। 27 अगस्त को पुलिस ने अंबाला से 38 लाख रुपये के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया था। यह पैसा सोमवार को अराजकता और दंगों को भड़काने के लिए इस्तेमाल किया जाना था और इसे अनुयायियों के बीच वितरित किया जाना था, जो कुछ भी करने के लिए तैयार थे।

एक अन्य सिरसा निवासी, शीला रानी, ने ​​2005 में एक हलफनामा तैयार किया था जिसमें लिखा था। लगभग तीन वर्षों से, सीबीआई डेरा की जांच कर रही है और जांच अधिकारी झूठे मामलों में डेरा प्रमुख, उसके प्रबंधकों और सेवा करने वालों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने फैसला किया है कि जब तक सीबीआई अपने मामलों को वापस नहीं ले पाती है, तब तक मैं भूख हड़ताल करुंगी। इस दौरान मैं मर जाती हूं तो यह मेरे खुद का फैसला होगा,  इसके लिए मुझ पर कोई बाहरी दबाव नहीं बनाया गया है।  

पुलिस अधिकारियों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि डेरा के अनुयायियों द्वारा तैयार किए गए सैकड़ों ऐसे हलफनामे हैं।
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