दिल्ली की निचली अदालत ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के संदिग्धों की मदद करने वाले दो आरोपियों को सात साल की सजा सुनाई है। इन दोनों पर आईएसआईएस के लिए फंड जमा करने और उसके संदिग्धों की मदद करने का आरोप हैं। जिला न्यायाधीश अमर नाथ ने कश्मीर के रहने वाले अजहर-उल-इस्लाम और महाराष्ट्र के फरहान शेख को ये सजा सुनाई है।
इससे पहले पिछले महीने कोर्ट ने इन दोनों समेत 36 साल के अदनान हसन पर आरोप तय किए थे। दोनों के साथ अदनान ने भी संदिग्धों की मदद की है। बता दें कि तीनों को दुबई से भारत लौटते ही 28 जनवरी को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक अदनान पहले कथित तौर पर इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़ा हुआ था और बाद में आईएसआईएस के करीब पहुंचने लगा।
एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक इन तीनों ने आईएसआईस के लिए फंड जमा करने, संदिग्धों के चयन और उन्हें आईएसआईएस में शामिल होने के लिए सीरिया पहुंचाने में मदद की है। बताया जा रहा है कि इन्होंने आईएसआईएस की कट्टर विचारधारा के प्रचार के लिए कथित तौर पर सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म की भी मदद ली। इसमें फेसबुक, व्हाट्सएप, वाइबर और स्काइप हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल है।