सिख एक्टिविस्ट गुरबख्श सिंह खालसा ने कुरुक्षेत्र जिले के थस्का अली गांव में पानी से भरे टैंक में कूदकर जान दे दी। वह 52 साल के थे। वह काफी समय से खालसा सिख कट्टरपंथियों की रिहाई की मांग कर रहे थे, जिन्होंने अपनी जेल की अवधि पूरी कर ली है, लेकिन अभी भी पूरे भारत की विभिन्न जेलों में बंद हैं।
कुरुक्षेत्र पुलिस अधीक्षक अभिषेक गर्ग ने बताया कि खालसा ने गांव में पानी के टैंक में छलांग लगा दी थी। इसके बाद उन्हें सरकारी अस्पताल लोक नायक जय प्रकाश में भर्ती कराया गया। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि वह काफी समय से लोगों की रिहाई की मांग कर रहे थे।
पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 174 के अंतर्गत केस दर्ज किया है। पुलिस ने जांच के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस ने कहा कि खालसा जेल में बंद सिख परिवार के सदस्यों द्वारा 'सिरोपा' पेश करने के बाद करीब 1 बजे पानी के टैंक के ऊपर चढ़ गए थे। इसके बाद वह जोर-जोर से चिल्लाते और नारे लगाते हुए टैंक में कूद गए। इसके बाद खालसा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। विरोध को देखते हुए पुलिस ने क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया है।
बता दें कि खालसा 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के लिए दोषी ठहराए गए 7 सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे थे। नवंबर 2013 में वह पंजाब के मोहाली में एक गुरुद्वारा में 44 दिवसीय भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। सरकार से आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने 27 दिसंबर 2013 को अपनी हड़ताल खत्म कर दी थी। लेकिन बाद में सरकार अपने दिए आश्वासन से मुकर गई थी।