टॉपर विवाद से पूरे देश में शर्मसार हो चुका बिहार बोर्ड अगले साल से परीक्षा का पूरा स्वरूप ही बदलने पर विचार कर रहा है। बोर्ड के नए अध्यक्ष आनंद किशोर ने इसके संकेत दिए हैं। सूत्रों की मानें तो इंटर और मैट्रिक की परीक्षा पैटर्न बदलने जा रहा है।
इसकी तैयारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने शुरू कर दी है। परीक्षा को कदाचार मुक्त बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसके लिए बिहार बोर्ड ने सीबीएसई से भी सलाह ली है।
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सीबीएसई से मिली सलाह पर विचार किया जा रहा है। सलाह पर अगर निर्णय हुआ तो अगले साल से बिहार बोर्ड में भी कोडिंग सिस्टम लागू हो सकता है। इसके बाद सीबीएसई की तरह ही बिहार बोर्ड के उत्तर पुस्तिकाओं पर भी छात्रों के नाम, कॉलेज या स्कूल का नाम, रोल नंबर, रोल कोड नहीं रहेगा।
इसकी जगह एक बार कोड रहेगा। उसी कोड के आधार पर मूल्यांकन की प्रक्रिया होगी। बोर्ड का मानना है कि इस व्यवस्था से कॉपी जांच (मूल्यांकन) के समय होने वाली पैरवी रोकी जा सकेगी। इसके अलावा बिहार बोर्ड सीबीएसई की तरह ही प्रश्नपत्रों के चार सेट तैयार करने पर विचार कर रहा है।
इसके पीछे भी तर्क है कि इससे कदाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है। इस संबंध में समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने अभी केवल इतना कहा है कि परीक्षा पैटर्न में बदलाव जरूरी है। हम लोग तमाम बोर्ड के परीक्षा प्रारूप का अध्ययन कर रहे हैं।
कहां पर किस पैटर्न से परीक्षा ली जाती है, इसकी जानकारी ले रहे हैं। इनके अध्ययन के बाद हम लोग कोई ठोस निर्णय लेंगे। परीक्षा में किस तरह के बदलाव होगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।