पांच दिनों तक चली मशक्कत के बाद अपने तीन प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ छत्तीसगढ़ का तीसरा सीएम बनने की राह के सभी रोड़े हटाने में सफल रहे भूपेश बघेल की पहली चुनौती किसान और नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाला से पार पाने की होगी। कांग्रेस नेतृत्व ने दस दिनों के अंदर उन्हें किसानों का कर्जा माफ करने और वादे के अनुरूप 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की व्यवस्था करने को कहा है।
इतना ही नहीं नेतृत्व ने उन्हें नान घोटाले के दौरान सामने आई डायरी के आधार पर जांच में तेजी लाने का भी निर्देश दिया है। किसानों को साधने केलिए भूपेश को तत्काल नौ हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी होगी।
दरअसल पहली पसंद इकलौते सांसद ताम्रध्वज साहू को सीएम बनाने में नाकाम रहने के बाद नेतृत्व ने अगले चुनाव में भाजपा को भ्रष्टाचार के मोर्चे पर घेरने का मन बनाया है। नेतृत्व की पहली योजना साहू को सीएम बना कर सूबे में भाजपा समर्थक इस बिरादरी का साध कर लोकसभा चुनाव में भाजपा को पटखनी देने की थी। इस योजना के नाकाम होने के बाद नेतृत्व ने भ्रष्टाचार के मोर्चे पर भाजपा और पूर्ववर्ती रमन सरकार को घेरने का मन बनाया है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक नान घोटाले की जांच के दौरान सामने आई डायरी जांच एजेंसियों के आरोप पत्र का तो हिस्सा है, मगर जांच का नहीं। चूंकि इस डायरी और घोटाले में पूर्व सीएम रमन सिंह, उनके परिवारिक सदस्यों, तीन वरिष्ठ मंत्रियों और दर्जन भर वरिष्ठ नौकरशाहों के नाम हैं। इसलिए जांच एजेंसियों ने जांच में तेजी नहीं दिखाई।
अब सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने इस मामले में 10 दिनों के अंदर जांच की नई जमीन तैयार करने का निर्देश दिया है। उक्त नेता के मुताबिक राज्य संगठन की कमान संभालने के बाद से ही बघेल लगातार रमन सरकार केखिलाफ हमलावर रहे हैं।
9000 करोड़ जुटाने की चुनौती
नेतृत्व ने मिशन 2019 की तैयारी के लिए भूपेश को हर हाल में दस दिनों के अंदर धान की 1800 रुपये प्रति क्विंटल की जगह 2500 रुपये प्रति क्विंटर सरकारी खरीद और ऋणमाफी की व्यवस्था करने केलिए कहा है। इस मद में नई सरकार को तत्काल करीब 9000 करोड़ की व्यवस्था करनी होगी। खासतौर से राहुल नहीं चाहते कि ऋणमाफी जैसे सवाल पर भाजपा को सवाल उठाने का मौका मिले। यही कारण है कि उन्होंने राजस्थान और मध्यप्रदेश के सीएम को भी ऐसा ही निर्देश दिया है।