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यूथ vs ओल्ड: कांग्रेस ने सोचा नहीं था सीएम पद पर ऐसे फंसेगा पेच

Thu, 13 Dec 2018 02:41 PM IST
अमित कुमार मंडल, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस में सीएम पद पर फंसा पेच
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कांग्रेस ने मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा से सत्ता छीनकर हर किसी को चौंकाया। कांग्रेस से ऐसे प्रदर्शन की उम्मीद शायद किसी ने नहीं की थी। लेकिन कांग्रेस अब नई मुश्किल में फंस गई है। तीनों राज्यों में सीएम पद पर पेच फंस गया है। चुनाव से पहले ही सवाल उठ रहे थे कि अगर कांग्रेस को मध्यप्रदेश और राजस्थान में बहुमत मिलता है तो सीएम पद पर पेच फंसेगा, हुआ भी वैसा ही। 
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सीएम पद के बहाने कांग्रेस में युवा बनाम उम्रदराज की जंग तेज हो गई है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस में नई पीढ़ी अपना प्रभाव बढ़ाती जा रही है। युवा नेता लगातार पुराने नेताओं के सामने चुनौती पेश कर रहे हैं। तीन राज्यों में जीत के बाद प्रतिस्पर्धा सतह पर आ गई है। किस तरह युवा बनाम ओल्ड की लड़ाई तेज हो गई है समझने की कोशिश करते हैं। 

मध्यप्रदेश: कमलनाथ बनाम सिंधिया 

यहां सीएम पद की रेस में अनुभवी कमलनाथ और युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया आमने-सामने हैं। कमलनाथ कांग्रेस के सबसे पुराने नेताओं में से एक हैं। संजय गांधी से उनकी दोस्ती आज भी सियासी गलियारों में याद की जाती है। वह गांधी परिवार के बेहद नजदीकी माने जाते हैं। वह 72 साल के हैं और सीएम पद के सबसे बड़े दावेदार भी। उनके मुकाबले ज्योतिरादित्य सिंधिया काफी युवा हैं। उनकी उम्र 47 साल है। राहुल गांधी ने जहां एक तरफ कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया, वहीं सिंधिया को चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया। अब जब कांग्रेस ने भाजपा की सत्ता पलट दी है तो दोनों ओर से सीएम पद पर दावेदारी पेश हो गई है। हाईकमान पसोपेश में है कि अनुभव को चुना जाए या युवा जोश को मौका दिया जाए। करीब 70 विधायकों ने सिंधिया से मुलाकात कर कयासों को और बढ़ा दिया है। 

राजस्थान: गहलोत बनाम पायलट

यहां का मामला तो और पेचीदा है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों ने सीएम पद पर अपनी दावेदारी ठोक दी है। 67 साल के गहलोत दो बार सीएम रह चुके हैं और उनके पास सरकार चलाने का पर्याप्त अनुभव है। इसलिए उनका पलड़ा भारी दिखता है। वहीं, युवा सचिन पायलट के पक्ष में कई विधायकों की लामबंदी की खबरें हैं। इन दिनों उनकी नाराजगी की खबरें भी उड़ी थीं। राहुल गांधी ने भी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भरोसा दिखाया था जिस पर वह खरे उतरे। गहलोत स्वभाविक रूप से सबसे बड़े दावेदार हैं, लेकिन पायलट भविष्य की उम्मीद हैं। इसी को लेकर अब हाईकमान पसोपेश में है कि किसके हाथ में कमान दी जाए। 

छत्तीसगढ़: सिंहदेव बनाम बघेल

इस राज्य में कांग्रेस को अप्रत्याशित जीत मिली। कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटों पर कब्जा जमाकर सियासी पंडितों को भी चौंका दिया। अब कांग्रेस के सामने नया संकट पैदा हो गया है, सीएम पद किसे दें? मुकाबला पुराने नेता टी एस सिंहदेव और अपेक्षाकृत युवा भूपेश बघेल के बीच है। 57 साल के भूपेश बघेल ने पार्टी अध्यक्ष का पद उस समय संभाला था जब प्रदेश में कांग्रेस नेतृत्व के अग्रिम पंक्ति के नेता झीरम घाटी में नक्सली हमले में मारे गए थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरकर वनवास झेल रही कांग्रेस की वापसी कराई है। वहीं, टीएस सिंहदेव का दावा भी कमजोर नहीं है। दरभा घाटी हमले में कांग्रेस के बड़े नेताओं की मौत के बाद 66 साल के सिंहदेव को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। 

हाईकमान के छूटे पसीने

मामला इस कदर बिगड़ा कि इससे निपटने में अब हाईकमान को पसीने छूट रहे हैं। विधायक दलों की बैठक में अब तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। गेंद राहुल गांधी के पाले में फेंक दी गई है। वह सभी दावेदारों से चर्चा कर रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा की तरफ से रैलियों में पूछा गया था कि कांग्रेस अपना सीएम दावेदार बताए। तब कांग्रेस का जवाब था कि विधायक ही सीएम तय करेंगे। लेकिन फैसला हाईकमान को लेना पड़ रहा है।
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