नए कृषि कानूनों को लेकर अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने कहा है कि नए कृषि कानून केवल किसानों के खिलाफ नहीं हैं, ये पूरे देश की जनता के खिलाफ हैं क्योंकि इन कानूनों के जरिए उद्योगपतियों को किसी चीज का मनचाहा भंडारण करने की छूट मिल गई है।
इससे उद्योगपति किसानों से कृषि उत्पाद सस्ती कीमतों पर खरीद कर भंडारण कर लेंगे और बाद में लोगों को मनमानी कीमतों पर बेचेंगे। केजरीवाल ने कहा कि कानून में ऐसे प्रावधान किए गए हैं कि इससे कालाबाजारी को रोकना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से तीनों कानूनों को तत्काल वापस लेने की अपील की।
देश के अन्नदाता किसान आज पूरे देश में भूख हड़ताल पर थे। इनके समर्थन में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी उपवास रखा। उन्होंने कहा कि पूरा देश इन कानूनों की असलियत समझ रहा है और यही कारण है कि आज पूरा देश किसानों के साथ खड़ा है, इसमें फौजी, डॉक्टर, वकील, प्रोफेशनल और अन्य सभी पेशे के लोग शामिल हैं और उन्हें इस बात की खुशी है।
केजरीवाल ने कहा कि किसानों को खालिस्तानी और अन्य अपमानजनक बातें कही जा रही हैं। लेकिन इन्हीं किसानों के बेटे बॉर्डर पर देश की जनता के लिए पहरा दे रहे हैं। जब वे इस प्रकार की टिप्पणियों को सुन रहे हैं तो उन्हें दुख हो रहा है, इसलिए किसी भी दल को देश के अन्नदाताओं को गलत बोलने का कोई हक नहीं होना चाहिए।
अन्नदाता कष्ट में तो देश सुखी कैसे
केजरीवाल ने कहा कि इस समय देश के अन्नदाता कष्ट में हैं और उनके कष्ट में रहते देश सुखी नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले किसान खेतों में रहकर कष्ट उठा रहे थे और अब अपने अधिकारों को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर ठंड में खड़े हैं और कष्ट उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन किसानों का कष्ट जल्द से जल्द दूर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने योजना बनाई थी कि किसान दिल्ली आएंगे तो उन्हें दिल्ली के स्टेडियमों में बंद करके रख दिया जाएगा। धीरे-धीरे आंदोलन कमजोर हो जाएगा और किसान अपने घरों को वापस लौट जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका क्योंकि दिल्ली सरकार ने केंद्र को अपने स्टेडियम देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे किसानों के साथ खड़े हैं और उनके हक की पूरी लड़ाई लड़नेे के लिए तैयार खड़े हैं।