राम मंदिर के लिए अधिकृत भूमि के कुछ हिस्से में कब्र होने का हवाला दे कर मंदिर निर्माण पर मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों को अखिल भारतीय संत समिति ने सिरे से खारिज कर दिया है।
समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि अधिकृत भूमि पर जब राम मंदिर बनेगा तो वहां उनके इष्ट देव शिव भी होंगे। सबको पता है कि शिव के निवास का एक स्थान श्मशान भी है, इसलिए मुस्लिम पक्ष के इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए।
महामंत्री ने यह भी कहा कि अब जबकि देश की सर्वोच्च अदालत ने राम मंदिर के पक्ष में निर्णय सुनाया है तब मुस्लिम पक्ष परंपराओं और तर्कों का हवाला दे रहे हैं। अगर मुस्लिम पक्ष इसे सही मानता है तो उसे अन्य विवादित स्थलों से भी अपना दावा छोड़ देना चाहिए, क्योंकि पैगंबर मोहम्मद साहब ने खुद विवादित स्थल पर बनी मस्जिद को तुड़वा कर एक आदर्श प्रस्तुत किया था।
गौरतलब है कि अयोध्या के नौ मुसलमानों ने वकील केजरिए ट्रस्ट को पत्र भेज कर अधिगृत स्थल पर मंदिर नहीं बनाने का अनुरोध किया था। पत्र में कहा गया था कि अधिगृहित करीब 67 एकड़ भूमि के करीब 4 से 5 एकड़ भूमि पर मुसलमानों के कब्रें थी। ऐसे में कब्र से जुड़ी भूमि पर मंदिर निर्माण नहीं हो सकता।