जोधपुर के बोरून्दा थाना इलाके के हरियाढ़ाणा में पेड़ों का काटने का विरोध कर रही युवती को जिन्दा जलाए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने इसे आत्मदाह का केस मानते हुए चार जनों को गिरफ्तार किया है। इन पर इस युवती को षड़यंत्रपूर्वक मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए जलने के लिए मजबूर करने का गंभीर आरोप है।
खेतों में होकर रास्ते बनाने के विवाद के चलते 25 मार्च को 20 साल की युवती को दबंगों द्वारा जिन्दा जलाए जाने का मामला सुर्खियों में आया था। जोधपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक की ओर से कराई गई जांच में इसे आत्मदाह का मामला माना गया है। इस मामले को लेकर पुलिस पर भी सवाल उठ रहे है। कहा जा रहा है कि आरोपियों के रसूखातों के चलते हत्या का यह मामला आत्महत्या में बदल दिया गया है।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि युवती के खेत में होकर ग्रेवल सड़क बनाई जा रही थी। सड़क बनाने का यह काम दबंगाई से हो रहा था। इसके लिए कोई प्रशासनिक स्वीकृति सक्षम स्तर पर जारी नहीं हुई थी। खेत में होकर रास्ता निकालने के लिए बड़े-बडे़ पेड़ों को काटा जा रहा था। विवादित रास्ते को चौड़ा करने के लिए युवती के खेत में काफी नुकसान पहुंचाया गया। जबकि पास में अन्य खेतों में नुकसान काफी कम हुआ।
इससे ये युवती जबरदस्त मानसिक दवाब में आ गई। इस प्रताड़ना के लिए कारण वह जलने पर मजबूर हो गई। पुलिस ने इस मामले में नामजद आरोपी सरपंच मदनसिंह, रतनसिंह, जीवनसिंह और गजेन्द्रसिंह को गिरफ्तार किया है। जबकि कुछ आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।
हालांकि पीडि़त पक्ष की ओर से पुलिस में दी गई रिपोर्ट में इन दबंगों पर युवती को जिन्दा जलाकर मारने का आरोप लगाया था। इसको लेकर राज्य विधानसभा में भी मामला उठा था। मीडि़या में आई रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जोधपुर और राजस्था हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायाधीशी गोपाल कृष्ण व्यास तथा महिला आयोग ने मामले में संज्ञान लिया था।