डॉ. स्नेहकिरन आगे कहती हैं कि हमने विरोध करने के बजाय तय किया कि पहले अपना कॅरिअर बनाएंगे। सामाजिक बंधनों और मान्यताओं का दबाव हम पर था, लेकिन सुनीत सिर्फ इतना कहते थे कि ‘मैं हूं ना, सब ठीक होगा, भरोसा रखो।’ मेरे माता-पिता को कैसे मनाना है, इसमें भी सुनीत की ही राय काम आई।
वे कहते थे कि प्यार में जितना सम्मान एक दूसरे का जरूरी है, उतना ही घरवालों का भी, अंतत: माता-पिता कभी हमारा बुरा नहीं सोच सकते। खैर, सुनीत का दिया हौसला, उनका साथ ही है, जिसके कारण मैं मम्मी-पापा को इस शादी के लिए मना सकी। हमारी शादी 2017 में हुई और 2019 में हमारे यहां एक बेटी ने जन्म लिया।
शादी के बाद कॅरिअर ने छुआ आसमान
मुझे गर्व है कि मैंने सुनीत को चुना, शादी के बाद मुझे केजीएमयू में गोल्ड मेडल मिला। यह उनके सपोर्ट का ही नतीजा है कि मैं घर और परिवार में बेहतर तालमेल बैठा पा रही हूं। जब भी कभी कहीं कोई अवरोध महसूस करती हूं तो बस सुनीत की बात याद कर लेती हूं कि ‘मैं हूं ना, सब ठीक होगा, भरोसा रखो।’