इसके बाद दोनों में बातचीत होने लगी। मुझे मालूम नहीं था कि प्यार हो गया, लेकिन प्यार का परवान चढ़ता गया। अपने प्यार के बारे में घरवालों को बताई, तो वह गुस्से से भर गए। बहरहाल, पढ़ाई पूरी होने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए मैं पुणे चला गया और वो लखनऊ चली गईं। मगर बातचीत का सिलसिला जारी रहा’। पढ़ाई पूरी होने के बाद 10 सितंबर 2013 को दोनों वैवाहिक बंधन में बंध गए। इनसे एक पुत्री वीरा सिंह भी हैं, जो साढ़े तीन वर्ष की हैं।
प्यार पर भारी पड़ रही थी जाति
डॉ. जितेंद्र बताते हैं कि प्यार को मंजूरी मिल जाती, लेकिन दोनों अलग-अलग जाति से थे। दोनों के माता-पिता इस रिश्ते को अपनी रजामंदी नहीं दे रहे थे। आखिरकार, उनके निश्छल प्रेम ने सभी के प्रेम को जीत लिया। मुश्किलें बहुत आईं, लेकिन मुझे अपने प्रेम और ईश्वर की महिमा पर यकीन था।
भाई व दोस्त की रही भूमिका
रील लाइफ में प्रेमिका के भाई और प्रेमी के दोस्त की प्रेम की प्रगाढ़ता में अहम भूमिका होती है। अक्सर यही भूमिका रियल लाइफ में दिख ही जाती है। डॉ. अंचल व डॉ. जितेंद्र के प्रेम में भाई व दोस्त तरुण राणा की अहम भूमिका रही है। स्वयं डॉ. जितेंद्र भी इस बात को बड़े ही साफगोई से कहते हैं कि इन लोगों ने बुरे और अच्छे वक्त में साथ दिया है। यदि वह साथ नहीं देते तो शायद स्थिति कुछ भी हो सकती थी।