हालांकि मन ही मन हम यह समझ चुके थे कि हम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इन तीन वर्षों के दौरान हम दोनों के पास न जाने कितने लोगों के प्रस्ताव आए, लेकिन न तो मैंने और न ही हर्ष ने इसे स्वीकार किया। इसके बाद आई शादी की बारी। मेरे घरवालों की तरफ से अरेंज मैरेज के लिए बहुत दबाव था।
उन्होंने मेरे लिए कई रिश्ते भी देख रखे थे। उनमें से एक रिश्ता तय होने ही जा रहा था कि मैंने घरवालों को अपने मन की बात बता दी। अच्छी बात यह थी कि मुझे स्वीकार करने के लिए हर्ष का परिवार पूरी तरह तैयार था, लेकिन मेरे परिवारवालों ने मना कर दिया। मैं अपने परिवार को समझाती रही।
समाज के लोगों ने भी मेरी बहुत आलोचना की और दबाव डाला। इसके बावजूद हमने बिना अपने प्यार का इजहार किए एक दूसरे का इंतजार किया। फिर एक दिन मेरे परिवारवाले हर्ष के परिवार से बात करने के लिए तैयार हो गए। सभी चीजें तय हुईं और 28 नवंबर, 2019 को हमारी शादी हो गई और अब मैं एक खुशहाल शादीशुदा जीवन जी रही हूं।
दिलचस्प यह है कि हमारी पूरी कहानी में 17 नवंबर की तारीख लकी रही। इस दिन मेरा और हर्ष दोनों का जन्मदिन होता है। हमारे परिवारवालों ने भी इसी दिन एक दूसरे से मुलाकात की थी और हमारी शादी तय हुई थी...।