कोरोना महामारी से जंग के लिए बनाई गई कोविड-19 टास्क फोर्स के चीफ ही अपने अस्पताल को कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने से बचा रहे हैं। मुंबई के आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने यह आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 टास्कफोर्स के चीफ डॉ. संजय ओक दक्षिण मुंबई प्रसिद्ध प्रिस अली खान अस्पताल के सीईओ हैं। लेकिन उन्होंने अपने अस्पताल को अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित अस्पतालों की सूची से बाहर रखा है।
गलगली ने कहा कि डॉ. संजय ओक ही तय करते हैं कि कौन सा अस्पताल कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए अधिकृत किया जाना चाहिए। डॉ. ओक मुंबई महानगरपालिका के सबसे बड़े केईएम अस्पताल के डीन रह चुके हैं और वर्तमान में प्रिंस अली खान अस्पताल के सीईओ हैं।
यह दक्षिण मुंबई के मझगांव स्थित नामचीन अस्पताल है। लेकिन कोविड अस्पतालों की सूची में शामिल नहीं है। दक्षिण मुंबई के कई इलाकों के कोरोना संक्रमित मरीजों को अंधेरी स्थित सेवन हिल हॉस्पिटल में उपचार के लिए भेजा जाता है।
लेकिन कोरोना संक्रमित मरीजों को 165 बेड वाले प्रिंस अली खान अस्पताल में नहीं ले जाया जाता। गलगली ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से इस मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मामले की जांच कर प्रिस अली खान हॉस्पिटल को कोविड अस्पताल घोषित किया जाए।