महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी चाहते हैं कि संसद सदस्य या विधानमंडल के सदस्यों के शपथ ग्रहण के लिए आचार संहिता बने। जिससे सदस्य निर्धारित प्रपत्र के अनुसार ही शपथ ग्रहण करें। कोश्यारी ने इस संबंध में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है।
राज्यपाल ने कहा कि नवनिर्वाचित संसद सदस्य व विधानमंडलों के सदस्य शपथ ग्रहण के दौरान निर्धारित प्रपत्र के अनुसार शपथ न लेकर अपने पार्टी के नेताओं और आराध्य व्यक्तियों का नाम जोड़ कर शपथ लेने लगते हैं। इसलिए शपथ की मर्यादा व गंभीरता बचाए रखने के लिए एक आचारसंहिता बनाना जरुरी है।
उन्होंने कहा कि शपथ ग्रहण के दौरान संसद या विधानसभा सदस्य अपने पार्टी के वरिष्ठ नेता या आराध्य व्यक्ति का नाम जोड़ने से शपथ ग्रहण प्रक्रिया की गंभीरता प्रभावित होती है। राज्यपाल ने अपने पत्र में राज्य में ठाकरे मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा है कि महाराष्ट्र में मंत्रिपद की शपथ लेते समय मैंने कुछ सदस्यों को टोका था।
उनसे फिर से शपथ लेने के लिए कहा था कि ‘जो लिखा है उसके अलावा कोई नाम न जोड़े।’ इसलिए इस मुद्दे पर आचार संहिता के संदर्भ में विचार किया जाना चाहिए।
राज्यसभा सदस्यों के शपथ ग्रहण में हुआ था विवाद
बीते दिनों राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान छत्रपति शिवाजी के वंशज भाजपा सांसद उदयनराजे भोसले ने 'जय भवानी', 'जय शिवाजी' का नारा लगाया था। इसका विरोध हुआ तो उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने उन्हें समझाया था। इसके बाद महाराष्ट्र में इसे छत्रपति शिवाजी महाराज के अपमान से जोड़ दिया गया और राज्य में आंदोलन शुरू हो गया था।
शपथ के दौरान पाडवी पर नाराज हुए थे राज्यपाल
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास आघाड़ी की सरकार के मंत्रियों को 30 दिसंबर 2019 को शपथ दिलाई गई थी। इस दौरान केसी पाडवी ने शपथ की तय लाइनें पढ़ने के बाद अपनी तरफ से कुछ शब्द जोड़ दिए थे। इसमें उन्होंने कहा था कि प्रकृति, इंसानियत और मुझे जिताने वाले मतदाताओं का वंदन करता हूं।'
राज्यपाल के रोकने के बावजूद पाडवी पढ़ते चले गए। इस पर राज्यपाल ने नाराजगी व्यक्त की और कहा कि ऐसा नहीं चलेगा। राज्यपाल ने पाडवी को फिर बुलाया और दोबारा शपथ दिलवाई थी।