कोरोना संकट के बीच महाराष्ट्र में फंसे प्रवासी मजदूरों को लेकर महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच ठन गई है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब तीन श्रमिक स्पेशल ट्रेन महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश रवाना हो चुकी हैं।
महाराष्ट्र में कोराना वायरस को लेकर गठित कंट्रोल रूम के प्रभारी प्रमुख सचिव भूषण गगराणी ने सोमवार को जूम एप पर वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दूसरे राज्य यदि अनुमति दें तो निजी वाहनों को भी पास जारी किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि फिलहाल, दिक्कत उत्तर प्रदेश से है। राजस्थान सरकार ने निजी वाहनों से उनके राज्य के लोगों को आने की अनुमति दी है। गगराणी ने बताया कि यहां से अभी तक 35 हजार मजदूर दूसरे राज्यों में जा चुके हैं।
फिलहाल, मुंबई से यूपी के लिए ट्रेन चलने की योजना नहीं है। लेकिन, भविष्य की तैयारी में मद्देनजर लोगों से फार्म जमा कराए जा रहे हैं।
महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रवासी मजदूरों को वहां जाने में अड़चन पैदा कर रही है। दूसरे राज्यों के यहां जितने प्रवासी मजदूर हैं, महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें भेजने की तैयारी की है।
लेकिन, उत्तर प्रदेश सरकार उन्हें लेने में आनाकानी कर रही है। यूपी सरकार की शर्त है कि कोविड टेस्ट कराकर भेजें। महाराष्ट्र में यूपी के करीब 30 लाख लोग रहते हैं। इतने लोगों का टेस्ट कराने में सालों लग जाएंगे। हमें लगता है कि यूपी की योगी सरकार इन लोगों को लेना नहीं चाहती इसलिए अड़चन पैदा कर रही है।
महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि एक तरफ यूपी सरकार ने प्रवासियों को वहां जाने में अड़ंगा डाल रही है। वहीं, लखनऊ से एक मंत्री ने मुझे फोन किया और कहा कि मुंबई से मेरे चाचा को भिजवा दीजिए। मैंने कहा, पहले राज्य सरकार और डीएम से तो परमीशन दिलवाइये। इस पर मंत्री के चाचा ने तपाक से कहा कि अरे उ का परमीशन देवइ हैं।