गृह मंत्रालय की ओर से अंतर्राज्यीय परिवहन शुरू करने के आदेश के बावजूद लॉकडाउन में फंसे प्रवासियों के लिए घर वापसी इतनी आसान नहीं है। प्रवासी श्रमिकों, छात्रों और नागरिकों को तमाम नियम-शर्तों का पालन करना होगा।
जिलास्तर पर नोडल अधिकारी प्रवासियों की सूची तैयार कर अन्य राज्य के संबंधित जिलाधिकारी को सौंपेंगे। दूसरे राज्यों से लोगों के आने-जाने के लिए दोनों राज्य के अधिकारी एक दूसरे से बातचीत कर यह तय करेंगे कि किसी मार्ग से और किस वाहन से गंतव्य तक जाना है।
जिलाधिकारी अथवा राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के पत्र के बिना किसी को भी स्थलांतरण की अनुमति नहीं दी जाएगी। जिले में पहुंचने के बाद सभी को 14 दिन तक क्वरंटीन रखा जाएगा।
प्रवासियों को दूसरे राज्यों में भेजने से पहले स्क्रीनिंग की जाएगी। जिन प्रवासियों में कोरोना संक्रमण के लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें यात्रा की अनुमति नहीं मिलेगी। लक्षण विहीन प्रवासियों को यात्रा के लिए पात्र माना जाएगा।
इसलिए जिला प्रशासन को पत्र में यह अनिवार्य रूप से लिखना होगा कि संबंधित प्रवासी में किसी प्रकार के लक्षण नहीं पाए गए हैं। यही नियम उन प्रवासियों के लिए भी लागू होगा जो निजी वाहनों से गांव जाने की तैयारी में हैं।
मंत्रालय में बनाए गए नियंत्रण कक्ष की जिम्मेदारी राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन करीर, महिला व बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव आई ए कुंदन, आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक अभय यावलकर को सौंपी गई है। नियंत्रण कक्ष में टेलिफोन क्रमांक 022-22027990-02222023039 के अलावा controlroom@maharastra.gov.in ईमेल पर संपर्क किया जा सकता है।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री अनिल परब ने कहा कि राज्य सड़क परिवहन निगम (एसटी) की दस हजार बसों को तैयार रखा गया है। परब ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को उनके गांव भेजने के लिए राज्य सरकार की ओर से हमारे विभाग को अभी तक कोई निर्देश नहीं मिला है। लेकिन निर्देश मिलते ही एसटी की बसों के माध्यम से प्रवासी मजदूरों को रवाना किया जाएगा।