कोरोना संकट के कारण 21 दिन के लॉकडाउन से उन लोगों पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है, जिनके परिवार गांव में हैं और जिम्मेदारी का बोझ उठाने वाले मुंबई में फंसे हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में ऐसे दर्जनों लोग हैं, जिन्हें आपदा की स्थिति में गांव जाना जरूरी है लेकिन नहीं जा पा रहे हैं।
किसी के पिता बीमार हैं, तो किसी की मां। किसी के बेटे का टाटा कैंसर अस्पताल में इलाज हो रहा है तो किसी के परिजन मुंबई में इलाज के बाद यहीं फंस कर रह गए हैं। स्थिति यह है कि लॉकडाउन में यदि किसी के परिजन की मौत हो जाती है तो क्रियाकर्म में भी जाने की अनुमति भी समय से नहीं दी जा रही है।
कई लोग तो ऐसे भी हैं जिनके परिवार में किसी की मृत्यु हो गई है तो वह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सिर्फ शव का अंतिम दर्शन कर पा रहे हैं। हालांकि अन्य राज्यों में इतनी सख्ती नहीं है, लेकिन देश में मुंबई कोरोना वायरस का मुख्य हॉटस्पॉट बनने की वजह से यहां लॉकडाउन के नियम काफी सख्त कर दिए गए हैं। इससे जरूरतमंदों की परेशानी भी बढ़ गई है।
अंतिम संस्कार के लिए चार दिन बाद मिली इजाजत
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के राजाराम शुक्ल की मां का देहांत हो गया। लेकिन मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए शुक्ल को महाराष्ट्र पुलिस से चार दिन के बाद गांव जाने की अनुमति मिली।
जबकि दूसरे राज्यों में इमरजेंसी के कार्यों के लिए 24 घंटे में अनुमति देने का आदेश है। राजाराम शुक्ल मुंबई के परेल इलाके में रहते हैं। लॉकडाउन के दौरान मां की मृत्यु के बाद उन्होंने कई नेताओं से गुहार लगाई।
उन्होंने उद्धव ठाकरे और गृहमंत्री अनिल देशमुख को भी ट्वीट किया। लेकिन, गांव जाने की अनुमति तब मिली जब राज्य के पूर्व गृहराज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने गृहमंत्री अनिल देशमुख से अनुरोध किया।
ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित को भी नहीं मिली अनुमति
उत्तर प्रदेश के ही महिपाल सिंह निवासी ग्राम व पोस्ट इस्लामाबाद जिला बिजनौर के 6 वर्षीय पुत्र वंश प्रताप सिंह ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित है। मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल मे बीते 27 मार्च को इलाज पूरा होने के बाद महिपाल सिंह ने अपने गृह जनपद बिजनौर जाने की अनुमित मांगी।
अपर जिलाधिकारी बिजनौर का अनुसंशा पत्र और टाटा हास्पिटल का पत्र भी अटैच किया, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस ने गांव जाने की अनुमति नहीं दी। महिपाल सिंह के मित्र अनिल सिंह ने बताया कि पांच दिन पहले डीजीपी के यहां ईमेल किया था कोई जवाब नहीं आया। शुक्रवार को फिर से आवेदन भेजा गया है।
अस्पताल में तीन दिन से बेहोश हैं पिता
मुकेश को अपने बीमार पिता की देखभाल के लिए आजमगढ़ जाना है। उनके पिता नामवर सिंह मेहनगर आजमगढ़ में एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हैं और मुकेश मुंबई से सटे कल्याण इलाके में रहते हैं। तीन दिन पहले नामवर सिंह बेहोश हो गए।
उन्हें हास्पिटल ले जाया गया। इसके बाद मुकेश ने गांव जाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। इसमें मुकेश के मित्र ने उनकी मदद की। उनके मित्र एडवोकेट पांडेय ने बताया कि इस संबंध में शिंदे नामक इंस्पेक्टर से कई बार फोन पर बात की, लेकिन तीन दिन बीत जाने पर भी मुकेश सिंह को गांव जाने की अनुमति नहीं मिली। पांडेय ने महाराष्ट्र पुलिस की करतूत को ट्विटर पर भी पोस्ट किया है।