कोरोना वायरस के संक्रमण की विश्वव्यापी समस्या और लॉकडाउन के चलते लोगों के सामने भोजन का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। लोग भूखे न रहे इसलिए तमाम स्वयंसेवी संस्थाओं ने मोर्चा संभाला है। इन्हीं संस्थाओं मे एक जेजेटी ट्रस्ट है, जो रोजाना 20 हजार लोगों के लिए खिचड़ी बनाकर परोस रही है।
केईएम अस्पताल हो या झुग्गी बस्ती सभी जगह खिचड़ी पहुंचाई जा रही है। उधर, अध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यकर्ता भी हर धर्म के लोगों के लिए सहारा बन रहे हैं।
जेजेटी के संरक्षक रमाकांत टिबरेवाल की तरफ गोरेगांव में एक सेंट्रलाइज्ड किचन बनाया गया है, जहां शुरुआत में 10 हजार लोगों के लिए खिचड़ी बननी शुरू हुई थी। लेकिन मांग बढ़ी तो अब सुबह 20 हजार और शाम 20 हजार यानि प्रतिदिन मिलाकर 40 हजार लोगों के लिए खिचड़ी बनाई जा रही है।
ट्रस्ट से जुड़े गोविंद माधव बताते हैं कि खिचड़ी के अलावा प्रतिदिन यहां 50 हजार थेपला तैयार किया जा रहा है। यहां तैयार खिचड़ी और थेपला एनजीओ, युवा मंडल, महिला मंडल और महानगरपालिका को सार्वजनिक वितरण के लिए दिया जाता है।
सेंट्रलाइज्ड किचन की जिम्मेदारी संभाल रहे हर्ष टिबरेवाल कहते हैं कि हम लोगों ने 29 मार्च से लोगों को मुफ्त भोजन देना शुरू किया है। जो भी आता है उसे हम मना नहीं करते। बस, इतनी हिदायत जरूर देते हैं कि भोजन नुकसान नहीं होना चाहिए।
हर धर्म के लोगों के सहारा बने आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यकर्ता
लॉकडाउन की इस विषम परिस्थिति में अध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यकर्ता हर धर्म के लोगों के लिए सहारा बने हैं। कुछ लोगों को एक सप्ताह के लिए अनाज आदि के किट दिए जा रहे हैं, लेकिन जिनका परिवार बड़ा है उनके लिए ज्यादा सहायता पहुंचाई जा रही है।
संस्था से जुड़े महावीर जैन बताते हैं कि मीरा रोड से फोन आया। कहा, असीम शेख को आपकी मदद चाहिए। मैने कॉल किया...तो शेख ने रोते हुए कहा कि घर में तीन छोटे बच्चे हैं, तीन मेहमान आए हैं, बगल मे दो अंधे बच्चे रहते हैं उनको भी वही खाना खिला रहे हैं।
लेकिन बस, आज का ही खाना पक सकता है क्योंकि हमारे पास इतना ही राशन है। जैन कहते हैं कि मैंने उनकी बात सुनने के बाद उनका हौसला बढ़ाया। सामान्य तौर पर हम जरूरतमंद को राशन का किट देते हैं, जिसमे जरूरत की बेसिक चीजें होती हैं।
लेकिन शेख की दयनीय हालत को देखते हुए उन्हें दो सप्ताह का पूरा राशन भेजवा दिया। शेख और उनके परिवार ने हम सभी को दुआएं दी।